Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 01, 2018 with No comments
ज्योति
मद्म हो रही ज्योति जो शहीदों ने
जलाई थी।
जाने क्यों जान उन्होंने हमारे लिए गवाई थी ।।
खून कुछ दिन उबाले खा कर रह गया सबका।
बड़ी मुश्किल से आसिफा ने अलख जगाई थी।
आज देश में प्रशासन व्यवस्था पर हालात हावी।
ऐसा क्यूँ हुआ जब कि उन्होंने शपथ खाई थी।।
हा, नोटा की जरूरत क्यूँ पड़ी आखिर चुनाव में।
जब संविधान में तो लोकतंत्र व्यवस्था अपनाई थी।।
कौन जगायेगा 'ज्योति' हिंदुस्तानियों के दिलों में।
जो राम राज्य की परिकल्पना यथार्थ हो पायेगी।
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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