दिल की आवाज
पहुंच जाती गर आवाज उन तक
तो वो हमें याद तो जरूर करते।
मेरा होने की जिद्द तो ना सही
मुझसे मिलने की फरियाद तो करते।।
शायद 'रीति' की दीवार से टकराकर
वर्णों में बिखर गई होगी मेरी आवाज।
या फिर किसी नई आवाज का जन्म,
आवाज मेरी लगी होगी बीच कतार।।
कोई दूसरी वजह भी ही सकती है
मैं अभी से ये भ्रम क्यों पालूं ?
हा, थोड़ा इंतजार ऒर करता हूँ
खुद को उसका गुनहगार न बनालूं।।
वजह चाहे जो भी हो, विश्वास है
भूलना होता तो वो हमें हां, न करते।
यकीनन बेखबर है दिली आवाज से
वरना वो हमे इश्क वेपनाह न करते।।
पहुंच जाती गर आवाज उन तक
तो वो हमें याद तो जरूर करते।
मेरा होने की जिद्द तो ना सही
मुझसे मिलने की फरियाद तो करते।।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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