बेटा या झूठी शान (एक आधुनिक सोच)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना*
सिंघानिया साहब का
उदास चेहरा देख उसके दोस्त ने कहा, ‘क्या बात है तुम इतना परेशान से नजर आ रहे हो..?
सिंघानिया साहब : कुछ
नही यार! बस ऐसे ही..
दोस्त : आज तक तुमने मुझ से कुछ नहीं छुपाया पर आज
छुपा रहे हो
सिंघानिया साहब : ले
सुन फिर........ मेरा बेटा है न राज वह अपनी पसंद की लड़की से शादी करना चाहता | वो
अपने जाति की भी नहीं है | अब तुहीं बता कि मैं क्या करूं...?
दोस्त
: ले यार इतनी सी बात | तूं नहीं बदलेगा
कभी सारा जमाना बदल गया | देख भाई मेरी मने तो उस लड़की के बारे में गहराई से पड़ताल
कर ले और रिश्ता पक्का कर दे | मैं तेरे बेटे को अच्छी तरह जानता हूँ वह कोई गलत
निर्णय नहीं लेगा | लेकिन फिर भी उस लड़की के माता पिता से मिलकर बात कर ले |
सिंघानिया साहब : पर दुनियां
, रिश्तेदार क्या कहेंगे...?
दोस्त : देख
ले भाई दुनियां क्या सोचेगी तूं ये मत सोच | दुनियां ने आज तक किसी को खुश देख कर
खुश होते देखा है | निरी स्वार्थ से भरी पड़ी है | अब तूं अपने तरफ ही देख, अपने
स्वार्थ के लिए अपने बेटे की ख़ुशी को पैरों तले रोंद रहा है | वो भी उस बेटे के
लिए जिसने तेरे एक बार कहने पर उस लड़की को छोड़ दिया जिसे वह बे इंतहा मुहब्बत करता
है |
सिंघानिया साहब : यार........|
दोस्त : क्या
यार.. यार.... अपने लड़के को देख कितनी परवाह करता है तेरी | हां अपने लड़की की
पड़ताल तो जरुर करेंगे| और तू मुझे एक बात बता अपने ये सब अपने बच्चों के लिए ही तो
कर रहें यदि हम अपने बच्चों की भावनाओं की कदर नहीं कर पा रहे हैं तो हमारा बड़े
होने का क्या हक | उनकी ख़ुशी में अपनी ख़ुशी
है दोस्त.
सिंघानिया साहब : पर
रिश्तेदार.......
दोस्त : यार
अब अपने बच्चों की ख़ुशी के बीच ये रिश्तेदार कहाँ से आ गये | देख तुने
अपनी बिरादरी में उसकी शादी करा भी दी तो क्या
गारंटी है की वह खुश रह पायेगा | उसकी जगह
अपने आप को रख कर देख फिर पता चलेगा कि राज पर
आज क्या बीत रही होगी..? झूठी शानको
छोडकर अपने बेटे की भावनाओं को समझने की कौशिश
कर बरना नाम का ही पिता रह जायेगा
लेकिन पिता नहीं बन पायेगा |
सिंघानिया साहब : तुमने
मेरी आंखे खोल दी.. लड़की की जिम्मेदारी तेरी है.....
दोस्त : तुम उसकी फ़िक्र छोड़ दो |
(राज यह सब छुपकर देख रहा था लेकिन उसके पापा की नजर उस पर पड़ी और उसे अपने
गले से
लगा इतना रोया कि शायद ही कभी रोया होगा | अब राज और सिंघानिया साहब की आँखों में
खुशियों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे |)
सिंघानिया साहब के दोस्त ने सब पता लगाकर सब सेट कर दिया राज और रूही की शादी
बड़ी
धूमधाम से की | और इस प्रकार राज और रूही की शादी ने दुनियां में एक नई सोच की मिशाल
धूमधाम से की | और इस प्रकार राज और रूही की शादी ने दुनियां में एक नई सोच की मिशाल
कायम कर दी
लेखक व्यू:-
तेरी चमड़ी मेरे जैसी
मेरी आंखे तेरे जैसी
फिर तेरे मेरे बीच में
(ये) जाति की दिवार कैसी..?
लेखक: सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र:- 9460914014
