March 30, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
बेटा या झूठी शान (एक आधुनिक सोच)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना*

सिंघानिया साहब का उदास चेहरा देख उसके दोस्त ने कहा, ‘क्या बात है तुम इतना परेशान से नजर आ रहे हो..?
सिंघानिया साहब :    कुछ नही यार! बस ऐसे ही..
दोस्त        :     आज तक तुमने मुझ से कुछ नहीं छुपाया पर आज छुपा रहे हो
सिंघानिया साहब :    ले सुन फिर........ मेरा बेटा है न राज वह अपनी पसंद की लड़की से शादी करना चाहता | वो अपने जाति की भी नहीं है | अब तुहीं बता कि मैं क्या करूं...?
दोस्त        :     ले यार इतनी सी बात | तूं नहीं बदलेगा कभी सारा जमाना बदल गया | देख भाई मेरी मने तो उस लड़की के बारे में गहराई से पड़ताल कर ले और रिश्ता पक्का कर दे | मैं तेरे बेटे को अच्छी तरह जानता हूँ वह कोई गलत निर्णय नहीं लेगा | लेकिन फिर भी उस लड़की के माता पिता से मिलकर बात कर ले |
सिंघानिया साहब :    पर दुनियां , रिश्तेदार क्या कहेंगे...?
दोस्त         :     देख ले भाई दुनियां क्या सोचेगी तूं ये मत सोच | दुनियां ने आज तक किसी को खुश देख कर खुश होते देखा है | निरी स्वार्थ से भरी पड़ी है | अब तूं अपने तरफ ही देख, अपने स्वार्थ के लिए अपने बेटे की ख़ुशी को पैरों तले रोंद रहा है | वो भी उस बेटे के लिए जिसने तेरे एक बार कहने पर उस लड़की को छोड़ दिया जिसे वह बे इंतहा मुहब्बत करता है |
सिंघानिया साहब :    यार........|
दोस्त         :     क्या यार.. यार.... अपने लड़के को देख कितनी परवाह करता है तेरी | हां अपने लड़की की पड़ताल तो जरुर करेंगे| और तू मुझे एक बात बता अपने ये सब अपने बच्चों के लिए ही तो कर रहें यदि हम अपने बच्चों की भावनाओं की कदर नहीं कर पा रहे हैं तो हमारा बड़े होने का क्या हक | उनकी ख़ुशी में अपनी   ख़ुशी है दोस्त.

सिंघानिया साहब :    पर रिश्तेदार.......
दोस्त         :     यार अब अपने बच्चों की ख़ुशी के बीच ये रिश्तेदार कहाँ से आ गये | देख तुने  
अपनी बिरादरी में उसकी शादी करा भी दी तो क्या गारंटी है की वह खुश रह पायेगा | उसकी जगह
अपने आप को रख कर देख फिर पता चलेगा कि राज पर आज क्या बीत रही होगी..? झूठी शानको
छोडकर अपने बेटे की भावनाओं को समझने की कौशिश कर बरना नाम का ही पिता रह जायेगा 
लेकिन पिता नहीं बन पायेगा |
सिंघानिया साहब :    तुमने मेरी आंखे खोल दी.. लड़की की जिम्मेदारी तेरी है.....
दोस्त         :     तुम उसकी फ़िक्र छोड़ दो |
(राज यह सब छुपकर देख रहा था लेकिन उसके पापा की नजर उस पर पड़ी और उसे अपने गले से
लगा इतना रोया कि शायद ही कभी रोया होगा | अब राज और सिंघानिया साहब की आँखों में 
खुशियों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे |)
सिंघानिया साहब के दोस्त ने सब पता लगाकर सब सेट कर दिया राज और रूही की शादी बड़ी 
धूमधाम से की | और इस प्रकार राज और रूही की शादी ने दुनियां में एक  नई सोच की मिशाल  
कायम कर दी

लेखक व्यू:-
            तेरी चमड़ी मेरे जैसी
            मेरी आंखे तेरे जैसी
            फिर तेरे मेरे बीच में
            (ये) जाति की दिवार कैसी..?

                                    लेखक: सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र:- 9460914014
March 29, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
बढ़ रही हैं दूरियां (आज का सच)
5*दो मिनट उका समय निकालकर जरुर पढ़ना*

बढ़ रह् ह्7 दूरियां, कुछ मेरी बेसमझी से
तो कुछ तेरी नादानियों से |
तेरा बार-बार 7Ysorry! के दोहराव से मैं  
हैरान हूँ  तेरी इन हरकत बचकानियों से
बढ़रही हैं यमKLओ667आई86दूHरियांIK99केR, कुछ मेरी बेसमझी से
तो कुछ तेरी नादानियों से |
iHH7ह्7
                प्यार के मामले मेंल बेसमझ हूँ ये ख्याल रखना
            क्या ता कब शक के लपेटे में आ जाओ......|
            आपकी..... रोज-रोयHमक6जजज की 
j            बढ़ रही हैं दूरियां,किल88कुह्6ह्IJ मेरी बेसमझी सेजबनमयमBय
            तो कुछ तेरी नादानियों से |

छोडनी होगी मुझे मेरी बेसमझी और तुम्हें नादानियाँ
बिगड़ते देखी हैं मैनें लोगों की बनी बनाई कहानियां |
कोई नहीं बच पाया आज तक इन तानातानियो से
बढ़ रही हैं दूरियां, कुछ मेरी बेसमझी से
तो कुछ तेरी नादानियों से |
                                    लेखक : सुखचैन मेहरा, 9460914014जग्य
March 25, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments

खास लग रहे हो (प्यार की एक तड़फ)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना*

लड़का :      आज तो तुम बहुत खास लग रहे हो
दूर होकर भी कितने पास लग रहे हो |
सांस ही निकल जाते, गर ये ख्वाब न होता
इतनी वास्तविकता का अहसास लग रहे हो ||

              लड़की :      पापा की पगड़ी, भाई की इज्जत और जमाने का डर
                          गर न होता तो मेरा तेरी जान पर बनना लाजमी था |
                          क्या बताऊँ दिल मेरा भी नहीं लगता अब बिन तेरे
                          मगर ये कहना भी मेरे लिए बड़ा नाजमी(शर्म युक्त) था ||

लड़का :      हा....क्या तारीफ़ करूं खुदा की या तेरी तुम से
उफ्फ्फ..बोला भी नही जा रहा अब कुछ मुझ से |
दूर रहकर भी सांसे अटका दी तुमने मेरी मेरे
होने वाले हमसफ़र की अथाह्स लग रहे हो ||
           
               लड़की :      बस कर अब अकेले ही मुस्करा रही हूँ, शक हो जायेगा
                           हमारे बड़ों को परवाह जो है हमारी, पर मना लेगे.. इतने |
                           बे समझ भी नही हमारे बड़े, बस तुम अब सांसे खरीद लो
                           रोज एक सांस निकालूंगी, बिताऊंगी लम्हे तेरे साथ इतने||

                लेखक: सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र:- 9460914014

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