अलार्म ( एक सुखद अहसास)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना *
परीक्षा नजदीक थी तो
सुबह जल्दी उठकर पढने का टाइम टेबल बनाया | मैं मोबाइल में अलार्म लगाकर सो गया |
सुबह आंख खुली तो टाइम देखकर चौंक गया सुबह के छः बजे हुये थे दरअसल अलार्म AM की
जगह PM सेट हो गया था | फिर अगले दिन अलार्म लगाया लेकिन भाई ने रिंगटोन लगा दी जो
एक दम से बजा तो कुछ ठीक नहीं लगा मूड खराब हो गया, वापस सो गया | फिर मेरी माँ ने कहा, बेटा कल से मैं आपको जगा
दूंगी आप पढने वाले बनो | उस दिन से मेरी माँ की आवाज से ही उठता था और बड़े आराम
से पढाई करता| बड़ा अच्छा लगता सुबह-सुबह माँ की आवाज से उठाना |
अब तो परीक्षा भी
समाप्त हो गयी थी, लेकिन फिर भी मैं माँ की आवाज सुनते ही उठ जाता हूँ | अब जब
मेरी माँ कहीं गाँव चली जाती हैं तो में लेट ही सही माँ की आवाज का रिंगटोन अलार्म
लगा ही लेता | मुझे माँ की आवाज से उठान उस आधुनिक अलार्म से कहीं ज्यादा अच्छा
लगता है |
लेखक:-
सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र:- 9460914014
