January 03, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on January 03, 2018 with No comments
समय की करवट (कहानी)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना *

आज मैं बहुत खुश था क्योंकि मेरे पापा मुझे नया मोबाइल दिलवाने वाले थेA पापा और मैं मोबाइल लेने के लिए घर से निकल पड़े, रास्ते में सोचता हुआ जा रहा था कि लेनोवो का फ़ोन लेलूँगा वही ठीक रहेगा| जब दुकान पर पहुंचे तो पापा ने दुकानदार से कोई बढ़िया सा मोबाइल दिखाने को कहा, ‘मैंने कहा, लेनोवो का दिखादो कोई | उसने कहा आजकल रेड्मी का चल रहा है | मैं ना कहने ही वाला था कि पापा ने कह दिया दिखा दो | पापा ने मुझे मेरी पसंद को दरकिनार कर रेड्मी कंपनी का मोबाइल दिला दिया और मेरी पिछले छःमहीनों की प्लानिंग पर पानी फेर दिया | मैं चुपचाप वह मोबाइल लेकर घर आ गया | एक झूठी ख़ुशी के साथ सभी को दिखाया | पापा के द्वारा लेकर दिया मोबाइल बहुत शानदार था लेकिन मेरे मन मैं तो अभी लेनोवो का ही चल रहा था |

मैं मन ही मन फुसफुसाने  लगा कि पापा ने मेरी पसंद तो एक बार भी नहीं पूछी | फिर क्या मोबाइल दिलाकर दिया| अब मैं सोच रहा था कि, मेरी पसंद का मोबाइल मुझे नहीं मिल पाया, मेरी भी तो गलती है मैंने एक बार भी उन्हें नहीं बताया, मुझे लेनोवो का ही मोबाइल पसंद है | लेकिन कुछ दिन बाद पता चला कि पापा मेरे लिए पिछले एक साल मोबाइल लेने के लिए पूछताछ कर रहे थे तो सबसे बेस्ट मोबाइल था जो मुझे दिलाया गया | अब मुझे लेनोवो का मोबाइल न मिलने का दुःख नहीं बल्कि अपने पापा की समझदारी पर नाज था | अभी तक मैं तो इसके लिए पापा को ही कसूरवार समझ रहा था | अब मुझे समझ आया की वह पापा की बेसमझी नहीं समय की करवट थी जिसे मैं तब नहीं समझ पाया | उस समय हम दोनों में से किसी की गलती नहीं थी बस वः तो समय की करवट थी, जिसका अंदाजा तब न लगा पाया|

तो दोस्तों अपने माँ-बाप जो भी हमारे लिए करते है अच्छा ही करते हैं, समय की करवट को माँ-बाप और हमारे बीच न आने दें पहले ही समझ लें इसी में हम सब की भलाई है| 
लेखक :- सुखचैन मेहरा,  सम्पर्क सूत्र:- 9460914014

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