Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on January 14, 2018 with No comments
मैं एक नेता हूँ (दो राजनैतिक पंक्तिया)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना *
सुबह स्कूल जाने से पहले मेरे पापा ने कहा, जा बेटा आय प्रमाण-पत्र के फॉर्म
पर अपने वार्ड पार्षद के साइन करवा ला | मैं जल्दी से खाना खा कर साइन करवाने के
लिए हमारे वार्ड पार्षद के घर आ गया | दरवाजा बंद था तो मैंने दरवाजे के एक तरफ
लगी घंटी को दबाने के लिए हाथ उठाया लेकिन तभी मुझे एक आवाज सुनाई पड़ी कि, हांजी
पार्षद साहब अब की बार क्या प्लान बनाया है जीतने का | आपका तो मुझको अब की बार जीतने
का कोई चांस नहीं लगता | क्योंकि अपने ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिससे ये वार्ड
वाले आपको दोबारा जितायें | MLA साहब आप चिंता क्यों करते हो हमारे वार्ड में 70
फीसदी लोग नसेड़ी और अनपढ़, गरीब है...... | मतलब अब की बार मिठाई की जगह पर शराब और
पैसा बांटोगे.....ह.ह.ह. | फिर MLA साहब बोले, पार्षद जी हम नेता लोग भी कितनी
कुत्ति चीज है हम चाहें तो देश को रुला सकते है और जब चाहें हसा सकते है | सारा
कुछ जनता के हाथ में होता है लेकिन फिर भी दुःख पाती है, हमारे जैसे मतलबी नेता को
मत देकर....| ये सब सुनाने के बाद मैंने दरवाजे की घंटी बजाई दरवाजा खुलने पर
अंदर गया, उन्होंने कहा अंदर मीटिंग चल रही है थोड़ी देर बाद में आना मैं घर वापस
लोटने लगा तो अंदर से आवाज आयी कि मीटिंग इनसे ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है.....|
मुझे अंदर बुलाया और साइन कर दिये | मैं मन ही मन बुदबुदाया “ ऐन्क्ला जीना मर्जी
चंगा बन्जा, मेरे मम्मी डेडी दी वोट तां तेनु नी पौण देंदा | मतलब (अंकल आप जितना
मर्जी अच्छे बन जाओ मेरे माँ-बाप का मत तो आपको डालने दूंगा)| मैं साइन करवा कर घर
चला गया |
तब मैं कक्षा 10वीं
मैं पढता था ये सब किसी और को बताने का दिमाग मैं ही नहीं आया | लेकिन आज मैं पुरे
यकीन के साथ कह सकता हूँ कि, “एक भ्रष्टाचारी व अयोग्य नेता जनता के अज्ञानी व
लालची जनता का ही परिणाम है |” लेखक
:- सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र:- 9460914014

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