January 04, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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तारीखों का फेर ( मेरी अभिव्यक्ति )

*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना *

31 दिसम्बर, 2017 की रात मैं और मेरा दोस्त हमेशा की तरह पार्क में घुमने निकले | रास्ते में मेरे दोस्त ने पूछा कि,’नये साल में क्या कुछ बदलाव कर रहा है अपने जीवन में ?’  मैंने कहा, ‘यार अपने आप को बदलने के लिए किसी खास दिन का इंतजार नहीं करता मेरे दोस्त’ | चल तूं बता तेरा क्या बदलने का इरादा है?

यार, एक तो मैंने निर्णय लिया है कि, फ्री टाइम मैं घर पर अपने परिवार वालों के साथ ही बिताऊंगा | और भी बहुत कुछ बदलना है मुझे अपने आप में इस नये साल पर.............. |

मैंने अपने दोस्त की बात काटते हुये कहा, भाई शुक्र है अंग्रेजों का जो नये साल का प्रबंध 3 महीनें पहले ही कर दिया | नहीं तो तुने कसम ही कहा रखी थी कि, ‘मैंने तो नये साल में ही अपने आप को बदलना है’ |

मेरे दोस्त अपने आप को बदलने के किसी खास दिन का इंतजार मत कर | एक साल में 365 दिन होते है और हर 24 घंटों बाद एक नया दिन आता है | कल भी तो वही 24 घंटे बाद वाला नया दिन है फर्क सिर्फ इतना है कि, तारीखों का फेर (घेरा) दोबारा 01.01.(2018)... हो जायेगा | इसलिए हमें नया साल की बजाय नया दिन मनाना चाहिए | इससे जब तारीखों का फेर..  दोबारा (01.01.(2019)) आयेगा तो आप अपने आप को 365 साल आगे तक बदल चुके होंगे| मेरा दोस्त मेरी बात सुनकर बोला यार में अभी से बदलना चाहता हूँ, अब 4 घंटों का इंतजार कौन करेगा यार.....| हम दोनों हस पड़े और आज बिना पार्क में जाये घर वापस लौट आये....बस यूं ही मजाक-मजाक में...घूमना तो हमने आज भी नहीं छोड़ा | लेखक:- सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र:- 9460914014

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