January 26, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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अलार्म ( एक सुखद अहसास)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना *
परीक्षा नजदीक थी तो सुबह जल्दी उठकर पढने का टाइम टेबल बनाया | मैं मोबाइल में अलार्म लगाकर सो गया | सुबह आंख खुली तो टाइम देखकर चौंक गया सुबह के छः बजे हुये थे दरअसल अलार्म AM की जगह PM सेट हो गया था | फिर अगले दिन अलार्म लगाया लेकिन भाई ने रिंगटोन लगा दी जो एक दम से बजा तो कुछ ठीक नहीं लगा मूड खराब हो गया, वापस सो गया  | फिर मेरी माँ ने कहा, बेटा कल से मैं आपको जगा दूंगी आप पढने वाले बनो | उस दिन से मेरी माँ की आवाज से ही उठता था और बड़े आराम से पढाई करता| बड़ा अच्छा लगता सुबह-सुबह माँ की आवाज से उठाना |
अब तो परीक्षा भी समाप्त हो गयी थी, लेकिन फिर भी मैं माँ की आवाज सुनते ही उठ जाता हूँ | अब जब मेरी माँ कहीं गाँव चली जाती हैं तो में लेट ही सही माँ की आवाज का रिंगटोन अलार्म लगा ही लेता | मुझे माँ की आवाज से उठान उस आधुनिक अलार्म से कहीं ज्यादा अच्छा लगता है |
                                              लेखक:- सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र:- 9460914014

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