क्यों सुख की तलाश में तुम वर्तमान का सुख गवा रहे हो चैन की जिंदगी जीने को वर्तमान की नींदें उडा रहे हो। क्यों करते हो भविष्य की चिंता, वर्तमान गवाकर जी लो सुखचैन की जिंदगी, क्यों बेबजह फड़फड़ा रहे हो।
स्वरचित सुखचैन मेहरा
🌷🌷🌷 शीर्षक " हंसना भूल गयी " 🌷🌷🌷एक प्रस्तुति 🌷🌷🌷 प्रेम कविता खुल कर हँसना भी भूल गई थी ! मैं तुमसे मिलना जो भूल गई थी! ...