February 24, 2020 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments

किस्मत बनाम काबिलीयत

सोचा रब से तुम्हें मांग कर किस्मत की आजमाइश करता हूँ।

तुम तो मिल गये लेकिन तुम्हारा साथ  नहीं मिल पाया मुझे।।


किस्मत की क़िस्में  भी अलग - अलग होती है मेरे हमसाथी।

वास्तव में ये  थोड़ी  देर  से  ही सही  समझ  तो आया मुझे।।


रब से कुछ और मांगने की हिम्मत भी नहीं रही अब मुझमें।

रब ने मेरे दिल की  फरियाद सुनकर भी इतना रुलाया मुझे।।


सोचता हूँ तेरा साथ मांग  लेता हूँ रब से, शायद  मिल जाये।

अगर किस्मत फिर से हार गई तो? ख्याल ने है डराया मुझे।।


जिंदगी में कभी किसी को सब कुछ  नहीं मिलता हमराही।
काबिलियत भी मायने रखती है, किस्मत ने सिखाया मुझे।।

-:-स्वरचित-:-
सुखचैन मेहरा


February 24, 2020 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in

पति पत्नी और कोई तीसरा

वो रब से हमे अपना नाथ मांग बैठे है।
हम बेखबर है वो जज्बात मांग बैठे है।।

हमने उन्हें कभी उस नजरों से नही देखा।
वो है कि हमसे हमारा हाथ मांग बैठे है।।

दो पल साथ चलने की सोच न थी मेरी।
आज वो उम्र भर का साथ मांग बैठे है।।

हल्की सी बात होती थी बस हमारे बीच
वह रोज रोज की मुलाकात मांग बैठे है।।

कह दिया मैंने किसी और का हूँ फिलहाल
फिर भी वो अपने घर बारात मांग बैठे है।।

प्रेम प्रस्ताव स्वीकार नहीं सात जन्मों तक
क्योकि ससुर से उनका साथ मांग चुके है।।

स्वरचित
सुखचैन मेहरा


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