February 24, 2020 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on February 24, 2020 with No comments | Categories:

पति पत्नी और कोई तीसरा

वो रब से हमे अपना नाथ मांग बैठे है।
हम बेखबर है वो जज्बात मांग बैठे है।।

हमने उन्हें कभी उस नजरों से नही देखा।
वो है कि हमसे हमारा हाथ मांग बैठे है।।

दो पल साथ चलने की सोच न थी मेरी।
आज वो उम्र भर का साथ मांग बैठे है।।

हल्की सी बात होती थी बस हमारे बीच
वह रोज रोज की मुलाकात मांग बैठे है।।

कह दिया मैंने किसी और का हूँ फिलहाल
फिर भी वो अपने घर बारात मांग बैठे है।।

प्रेम प्रस्ताव स्वीकार नहीं सात जन्मों तक
क्योकि ससुर से उनका साथ मांग चुके है।।

स्वरचित
सुखचैन मेहरा


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