Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 01, 2018 with No comments
माँ की ममता - 2
[1].
लब्ज़ नहीं है माँ
तेरी ममता के लिए
मेरे पास कहने को
वरना ये लोग तो
मेरी बहुत बोलने वालों में
गिनती करते है।
[2].
कलम उठाई थी माँ
तेरी ममत्व भाव को
लिखने के लिए मैंने
लेकिन
कलम की नोंक के
आँसू देख
मन भर गया मेरा
ऐसे लगा कि
कलम से बर्बस्ता
कर रहा हूँ..
[3].
माँ तेरी ममता का
व्यख्यान
सुना है...
भगवान स्वयं भी
नहीं कर पाये।
और मैं मूर्ख ने
ये जानते हुए
भी कलम उठाली!
स्वरचित
सुखचैन मेहरा #9460914014

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