Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 01, 2018 with No comments
धरती माता (तांका लेखन)
[1]
धरती माता
आँखों से आँसू बहे
पर्यावरण
दुश्मन बेटे स्वंय के
असफल रक्षक।
[2]
है मातृभूमि
वनसम्पदा घटी
हृदयाघात
अपने ही अघाती
कौन बने रक्षक।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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