Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 16, 2018 with No comments
लम्हा लम्हा बीत रहा है
लम्हा लम्हा बीत रहा है
अतीत बन रहा है हर पल
आखिर कब समझेगा समय को
जब जीवन ही पतित गया तब।
समय की नजाकत समझनी होगी
अगर सफल जिंदगी में होना है
हर पल की नजाकत समझनी होगी
अगर तूने हर हाल में सफल होना है।
पल पल जिंदगी का अनमोल है
हर लम्हा जिंदगी का बेमोल है
अब समझ जा वरना पछतायेगा।
बर्बादी में भी इसी का ही योग है।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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