Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 20, 2018 with No comments
कुछ पंक्तियां - 3
आसान नही होता जिंदगी का सफर काटना
अगर जिंदगी में हमसफर का साथ न हो तो।
न जाने कहां खो गया है बचपन मेरा
जहां रोने मात्र से मनोकामना पूरी हो जाती थी
आज सोच रहा हूँ शायद कोई बचपन का बैकअप
होता तो अपनी जिंदगी गिरवी रखकर खरीद लेता।
बड़ी खमोशी से रहता था मैं गुमसुम
फिर। हमसफर के आ जाने से
जिंदगी के मायने ही बदल। गए।
बीतें पलों की यादें रह जाती है बस
पल तो न जाने कहाँ उड़ जाते है पंख लगाकर
अकसर याद करता हूँ उन पलों को
जो मैंने मेरे हमसफर के साथ बिताए थे
लेकिन अब उन्हें मेरी याद दिलाने के लिए
किसी खास लम्हें की फिर
स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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