Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 05, 2018 with No comments
धनतेरस और कुम्हार
सजी हुई साज दुकाने धनतेरस के आगमन पर
खुशी का माहौल है चहुँ ओर असर हर जन पर।
सजाई है दुकान एक कुम्हार ने भी बीच बाजार
एकलौती दुकान है, फिर भी ग्राहकों का इंतजार।
चारों ओर से घिरा है कृत्रिम सज्जा की दुकानों से
आज बेगानापन पनप रहा है,मेरे देश के इंसानों में।
क्यों विश्वास करे जनता, चाइना की फुलझड़ियों में
दीपों सी रोशनी कहाँ, कृत्रिम प्रकाश की लड़ियों में।
आँखों में आई चमक, अब ग्राहकों के आ जाने से
हा खुश था वो दीपकों के प्रति सजग हुए जमाने से।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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