Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 10, 2018 with No comments
कान्हा की आवाज
सुन ओ कन्हैया
उलाहना दिया है
राधा ने ।
मुरली को थामे नहीं
मेरे मन के भाव
जगाता है।
माता श्री में तो हूँ
गोपालक, मधुरधुन
मैं गऊओं को
सुनता हूँ।
नही बेटा, जब गुजरे
राधा की गली
मुरली वादन बन्द
कर दिया कर।
उलाहना एक और भी है
तू गोपियों को भी
सताता है।
तू आवाज लगाकर
गऊओं को चरा।
नहीं माँ मैंने अगर आवाज दी तो
समस्त जगत् की गोपियां,
गौधन, जीव समूह
और न जाने कौन कौन?
मेरे आगे आगे विचरण करने लगेंगे।
फिर माँ तुझे तो उलाहनों
की आदत सी पड़ जाएगी।
माते तुम ही कह दो राधा से
मुरली छोड़, काज करे।
मेरी मुरली तो गऊओं
को समर्पित है...
राधा को तो मेरा सारा
जीवन ही अर्पित है...
स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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