Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 07, 2018 with No comments
दीवाली व सिपाही
सरहदी सिपाही हूँ, आज मैं भी दीवाली मनाऊंगा
दीप जलाकर सरहदी समय को यादगार बनाऊंगा।।
मेरी साथियों की शहीदी की याद भी मैं दिलाऊंगा।
भारत माता का गीत, मैं आज खुलकर सुनाऊंगा।।
प्रिय संग बीते पलों को याद कर, दिल बहलाऊंगा
दुश्मनों को धूल चटाने की कोई नीति नई बनाऊंगा।
देश का रखवाला हूँ मैं दीवाली इस तरह मनाऊंगा।
दुश्मनों को चटाई धूल का जश्न भी मैं मनाऊंगा।।
क्या पता कब हिन्द देश के मैं काम आ जाऊं।
जब तक जान है मैं हर दिन दीवाली सा मनाऊंगा
स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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