सालगिरह
ऐ हमसफर याद है वो पल,
जो हमने एक साथ बिताए थे।
क्या याद है तुम्हे वो लम्हे,
जो मिलकर खास बनाए थे।।
हां, आज तारीख वही है लेकिन,
साल का अक्षर एक बढ़ गया है।
आज भी प्यार कम नहीं हुआ,
बल्कि ऒर ज्यादा बढ़ गया है।।
हां, यह तन का रिश्ता नहीं है
दो पाक रूहों का रिश्ता है।
उम्र के इस पड़ाव में भी
मेरे अन्तर्मन की मधुलिका है।।
ये सालगिरह मुबारक हो प्रिया
कुछ उपहार है तुम्हारे लिए।
मुझे कुछ नही चाहिए ओ प्रिया
तेरा प्यार ही काफी है मेरे लिए।।
उम्र नहीं होती प्यार की दोस्तो
प्यार तो बस दिल से होता है।
दुया करो कि दिल सदा जवां रहे
ये रिश्ता बस दिल से ही निभता है।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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