November 10, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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छठ पर्व

घर की  सुख  समृद्धि  बनी रहे
छठ   पूजा   के   साथ   हमेशा।
चार दिनों का है ये पर्व   हमारा
बिना 'मूर्ति' का है ये पर्व कैसा।।

राज पाठ सब गवां बैठे थे पांडव
स्वंय द्रोपदी तक को  हार गए थे ।
कृश्नादेश पर द्रौपदी ने किया व्रत
तब जाकर पांडव बहाल हुए  थे।।

सूर्य को देव मानकर करते है व्रत
सब  दूध   सूर्यदेव को  चढ़ाते है।
सेंधा नमक,  अरवा चावल  और,
कद्दू की सब्जी का भोग लगाते है।।

न अन्न  खाते  न  पानी पीते सब
सन्ध्याकाल  में  खीर  बनाते  है।
मेरे भारत देश का अनोखा  पर्व
छठ गीत विदेशी भी गुनगुनाते है।।

स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014


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