November 01, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 01, 2018 with No comments

माँ की ममता

माँ की ममता क्या है?
पता नहीं
माँ से बिछड़े
उस नन्हे बालक
को ।
कभी माँ के
अंक में
खेला हो तो
पता चले
कि क्या है ?
माँ की ममता।
कभी सूरत ही नहीं देखी
इक माँ की
कभी माँ का आँचल
ही नहीं मिला।
जब कभी नींद आयी,
तो बस सो गया
नील गगन की छांव में।
जब कभी भूख लगी
तो जो मिला खा लिया।
वो माँ के हाथ का तो
खाया ही नहीं
उसको क्या पता
क्या होती है माँ की ममता
जिसने माँ का सानिध्य
पाया ही नहीं.....

स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014


0 comments:

Bookmark Us

Delicious Facebook Favorites More Stumbleupon Twitter

Search