December 11, 2019 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments

शिक्षा कहती है

शिक्षा कहती है
उस भगवान से डर।
शिक्षा कहती है
तू गुनाह न कर।
शिक्षा कहती है
रख दुनिया की खबर।
शिक्षा कहती है
ना रह बेखबर।
शिक्षा कहती है
उतार तनाव का ज्वर।
शिक्षा कहती है
जी चाहे वो कर।
शिक्षा कहती है
बोल मीठे मीठे स्वर।
शिक्षा कहती है
कदर माँ बाप की कर।
शिक्षा कहती है
अपराध न कर।
शिक्षा कहती है
तू संघर्ष कर।
शिक्षा कहती है
तू सही है तो मत डर।
शिक्षा कहती है
सामना बाधाओं का कर।
शिक्षा कहती है
सहायता निर्धनों की कर।
शिक्षा कहती है
दुःखियों के दुखों को हर।
शिक्षा कहती है
मत रह गवार बनकर।
शिक्षा कहती है
जी इंसान बनकर।
शिक्षा कहती है
बन तू सच्चा हमसफ़र।
जी तू इंसान बनकर, जी तू इंसान बनकर।।

(सच मे शिक्षा बहुत कुछ कहती है,
जो कहती है अच्छा कहती है, सच कहती है।
जरूरत तो है बस चुपकरके सुनने वाले की और शिक्षा के बताए रास्ते पर चलने वाले की)

स्वरचित
सुखचैन मेहरा


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