।।मुक्तक कविता : तुम देना साथ मेरा सनम ।।
जीवनसंगिनी
माँ का घर मैं छोड़ कर आई हूँ
घर से माँ की तश्वीर ले आई हूँ।
अब तुम मुझे अपना लेना साथी
एक घर से पराई होकर आई हूँ।।
जीवनसाथी
मेरा घर आँगन आज से तेरा हुआ
एकलौता दिल, आज से तेरा हुआ।
बस मेरे माता पिता अपने समझना
मेरा तन मन धन आज से तेरा हुआ।।
जीवनसंगिनी
मुझे मेरी माँ की याद आ रही है
मुझ मेरे पापा की याद आ रही है।
एक नए परिवार की जरूरत है
बिछड़े परिवार की याद आ रही है।।
जीवनसाथी
माँ से दूर हो तुम्हें याद तो आएगी
पापा से दूर हो याद तो आएगी।
मेरे परिवार को तुम अपना समझना
परिवार से दूर हो याद तो आएगी।।
जीवनसंगिनी
तुम मेरा ख्याल रखोगे? वादा करो
अपनों सा प्यार दो गे ? वादा करो।
अब तुम ही मेरा घर संसार हो साथी
तुम मेरा संसार बनोगे? वादा करो।।
जीवनसाथी
अपना बनाकर रखूंगा, वादा है मेरा
दिल मे बसाकर रखूंगा, वादा है मेरा।
तुम भी मुझे पराया मत समझना
रानी सी सजाकर रखूंगा, वादा है मेरा।।
जीवनसंगिनी
घर की जिम्मेदारियां कैसे संभालूंगी?
जीवन की नोका को कैसे संभालूंगी?
अगर डगमगा जाए, संभाल लेना
उफ्फ़! पता नहीं ये सब कैसे संभालूंगी??
जीवनसाथी
मत घबरा, तूम नाव, मैं पतवार बनूंगा
हर मौसम, हर घड़ी तेरे साथ रहूँगा।
तुम देना साथ मेरा मेरे अज़ीज, हमदम
तेरे बिना तो मैं अकेला पड़ जाऊंगा।।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा
