शादी से पहले की आजादी
आज पराग बहुत खुश था, क्योंकि शादी की तारीख तय हो चुकी थी। अब वो सोचने लगा कि बस किसी तरह ये महीना भी बीत जाए।
उधर कोमल (पराग की मंगेतर) की फ्रेंड्स ने कहीं घूम कर आने की योजना बनाई। कोमल मान गयी। कोमल का दोस्त आर्यन भी साथ मे ही था।
कोमल ने अपने माँ बाप से आखरी बार घर से बाहर कही घूम के आने के लिए पूछा।
माँ, शादी का महीना तय हो गया है, मैं इस घर से चली जाऊंगी। मेरी सहेलियां मुझ से बिछड़ जाएंगी। मैं एक आखरी बार अपने दोस्तों के साथ टूर पर जाना चाहती हूँ।
माँ: ठीक है बेटा मैं शाम को तेरे पापा से बात करती हूँ।
कोमल की माँ ने कोमल के पापा से बात की।
वो बोले, 'कोई ऊंच नीच हो गयी तो ?'
माँ: इतना तो विश्वास है हमें हमारी बेटी पर।
पापा: विश्वास तो है लेकिन आज कल समय सही नहीं है लड़कियों के लिए।
ये सब कोमल चुपके से सुन रही थी।
कोमल बीच में ही बोल पड़ी, 'पापा, आप कहते हो तो मैं कही नही जाऊंगी।
कोमलआ का उदास चेहरा देख कोमल के पापा ने हा कर दी।
कोमल बहुत खुश हुई।
अगले ही दिन सब दोस्त घूमने के लिए निकल पड़े।
वह सब गंतव्य जगह पर पहुंचे। सब बहुत खुश थे। हर एक पल को जी रहे थे। कोमल को फ़ोटो खिंचवाने का बहुत शोंक था। उसने ग्रुप में फ़ोटो खिंचवाई।
उसका दोस्त आर्यन ने उसके साथ एक सेल्फी लेने की इच्छा जताई। कोमल ने खिंचवा ली।
अब शाम हो चुकी थी। सब अपने अपने काम मे व्यस्त हो गए आर्यन ने कोमल को एक बात कहने का कह कर अकेले में मिलने को कहा।
कोमल ने मना कर दिया। लेकिन उसने दोबारा कहा तो मान गयी।
कोमल चली गयी। थोड़ी देर आर्यन और कोमल ने बातें की।
'अब एक महीना ही रह गया है तेरी शादी में मेरा एक काम तो करदे।' आर्यन ने कहा।
'कैसा काम?' कोमल ने पूछा।
बस मुझे छूना है तुझे अभी नहीं शादी से एक दिन पहले या बाद में कभी भी।
कोमल ये सुनते ही आर्यन को एक तमाचा लगा वहां से चली आयी।
रमा के पूछने पर सब बताया दिया कोमल ने। रमा बोली 'इसमें दिक्कत क्या है? मैंने भी किया था।'
(रमा शादीशुदा थी)
'अरे! मजे मार ले शादी के बाद सब खुहाइशें अधूरी रह जाती और पराग को कौनसा पता चलने वाला है ।'
(अब कोमल ने जो कहा सुनने लायक था)
'तू अपने दिल पर हाथ रखकर सोच कि तू किसी की पत्नी कहलाने के लायक है या नहीं।'
'अगर हम अपने होने वाले पति के लिए अपनी इज्जत बचा के नहीं रख सकते तो हम किस मुँह से उसे अपना पति परमेश्वर कहेंगे।'
(रमा बस चुप चाप सुन रही थी।)
क्या परमेश्वर के दरवार पर जूठा प्रसाद चढ़ा है कभी?
'अरे! हम सब इक्कठे पढ़ें है, इस लिए सोचा कि, शादी से पहले एक टूर शेयर कर ले एक दूसरे से।'
शादी से पहले मजे लेने का मतलब ये नही है कि, 'अपनी इज्जत तक दांव पर लगा दे। इक्कठा होने की खुशी ही कुछ अलग होती है यार।'
(रमा अपने आप के लिए शर्मिंदा थी और उसे कोमल की सोच पर नाज भी हो रहा था।)
वह सब अपने अपने घर लौट आये। कोमल ने उस बात को एक बुरा वक्त मान कर छोड़ दिया।
शादी से ठीक एक दिन पहले आर्यन का एक मैसेज आया कि, 'मुझे मिलो नही तो तेरी सारी तश्वीरें तेरे मंगेतर को दे दूंगा।'
कोमल ने उसका प्रतिउत्तर देते हुए लिखा कि, 'तूने जो करना है कर ले जब तक मैं सही हूँ मुझे डरने की कोई जरूरत नहीं।
(कोमल ने आर्यन को ब्लॉक कर दिया। आर्यन ने इससे ख़फ़ा हो कर वो सारी सेल्फियां, फोटोज पराग को सेंड कर दी )
पराग ने फोटोज देख कर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं किया। पराग ने उसकी बहन (पड़ोसी बहन) को कोमल से बात करने का संदेश दिया।
फिर दोनों ने पापा के व्हाट्सएप्प नंबर पर बात करने का फैसला किया।
तकरीबन रात 10.14 मिंट पर बात शुरु हुई ।
पराग: हेलो जी।
कोमल: जी
पराग: आपके किसी फ्रेंड ने ये फोटोज भेजी है....
(फोटोज प्रेषित करते हुए लिखा)
कोमल: हा, ये मेरे साथ कॉलेज में पढ़ता है।
पराग: यदि कोई ऐसी वैसी बात है तो बता दो। कहीं आप दोनों एक दूसरे से प्यार तो नहीं करते? यदि ऐसी बात है तो मैं बीच मे से हट जाता हूँ।
कोमल: नही, ऐसी कोई बात नही है।
पराग: यदि कोई ऐसी बात है तो बता दीजिए क्योकि मैं किसी के प्यार को नहीं छीन सकता क्योकि आज तक किसी का प्यार छीनकर कोई खुश नहीं रह पाया।
कोमल: नहीं, आप यकीन मानिए ये मेरे साथ कॉलेज में पढ़ता है । हम एक ही क्लास में पढ़ते है। हम सिर्फ एक सहपाठी है।( टूर पर हुआ वो सब बता दिया।)
पराग: ठीक है, आप चिंता न कीजियेगा। मुझे आप पर पूरा यकीन है।
कोमल: ओके, थैंक्स। ऐसी कोई बात होगी तो सबसे पहले आपको बताऊंगी।
पराग: ओके, कोई बात नहीं। कहीं मरा मत देना जी। जिंदगी का सवाल है अपने दोनों की।
कोमल: आपको यकीन नहीं है अभी भी।
पराग: गुस्ताखी माफ कीजिएगा। मजाक कर रहा था।
कोमल: ओके, और बताओ
पराग: बस ठीक है...
(इस तरह जो भी बात थी क्लियर हो गई।)
शादी की सब तैयारिया हो चुकी थी
अब समस्या तब खड़ी हो गयी जब ये बात कोमल के माँ बाप को पता चली।
वो सोचने लगे कि ये सब टूर के दौरान हुआ है। ना टूर पर भेजते और ना ये बात होती।
जब पराग को पता चला कि कोमल के घर वाले उसे गलत समझ रहे है तो पराग ने कोमल के माता पिता से बात करके सब समझा दिया।
अगले दिन राहुल बैंड बाजा लेकर आ गया। कोमल के पास बहुत से उपहार इक्कठे हो गए। सब खुश थे।
शादी बड़ी धूमधाम से हो गयी।
उन उपहारों में से एक उपहार आर्यन का भी था। (उस उपहार पर उसका संक्षिप्त नाम A. K. (आर्यन कुमार) लिखा था)
कोमल उपहार को सबके सामने खोलना नहीं चाहती थी।
कोमल की चचेरी बहन: खोलो ना दीदी......
एक अन्य: ये भी खोलो ना.....
कोमल की सहेली:- कोमल खोल इसे भी...
लेकिन कोमल उसे अभी भी खोलना नहीं चाहती थी। सोच रही थी कि कुछ गलत ना हो इसमें ...
आखिर कोमल ने उस उपहार को खोल ही लिया। उसमें जो लिखा था पढ़कर कोमल का सारा डर छूमंतर हो गया।
उपहार में आर्यन का माफी नामा था। कोमल ने उसे सब के सामने पढ़ना उचित नहीं समझा। लेकिन उसमें लिखी एक एक बात आर्यन के सुधर जाने की गवाही दे रही थी।
आज कोमल का जीवन बहुत हँसी खुशी बसर हो रहा है। जैसा पति कोमल को मिला वैसा पति भगवान सब को दे।
और.......
जैसी पत्नी पराग को मिली वैसी पत्नी भगवान सब को दे।
मेरे ख्याल से ऐसी जोड़ियां दुनियां की सबसे बेहतरीन जोड़ियों में से एक होती है।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा