Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on March 21, 2019 with No comments
होली तेरे संग प्रिये।
होली का त्योहार आया, प्रिये,
अपने संग खुशियां लाया, प्रिये।
आओ खेलो तुम मेरे संग, प्रिये,
लगाओ प्रेम रंग,अंग अंग,प्रिये।
तेरे बिन तो हर रंग बे रंग, प्रिये,
होली मोद तो तेरे ही संग, प्रिये।
भर लो प्रेम की पिचकार, प्रिये,
गिला कर दो रूह संसार, प्रिये।
ज़रा और पास आओ ना, प्रिये,
दूर रहकर यूँ तड़फाओ ना, प्रिये।
(वो पास आ चुके है ☺️☺️☺️)
कर तेरे दर्शन मन हुआ प्रसन्न, प्रिये,
मुझे तेरी रूह रंगनी है न तन, प्रिये।
रंगों का त्योहार है रंग लगाऊं, प्रिये,
जी करे तेरे ही रंग में रंग जाऊं, प्रिये।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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