कहाँ बाँधोगी राखी को ??
भाई
बहना मेरी कलाई सलामत नहीं
तुम कहां बन्धों गी राखी को।
बिन हाथों के कैसे रक्षा करूँगा
क्या निभा पाऊँगा मैं साखी को।।
बहन
भाई तुम उदास ना हो इस दिन
पैरों पर बांध दूंगी मैं राखी को।
मेरी रक्षा तेरे दिए संस्कार करेंगे
हां ऐसे निभाएगा तू साखी को।।
भाई
फिर भी कमी तो कमी होती है
असफल हूँ कुछ भी करने में।
जब कोई मुसीबत आती है तो
विश्वास रखता हूँ मैं डरने में ।।
बहन
कोई कमीं नहीं दिखती तुझ में
किस्मत समझती हूँ तेरी बहन।
हार मत मान यूँ मेरे प्यारे भैया
आग उगले सदा जहरि जहन।।
भाई
छोटी है पर होंसले में है बड़ी
जिद्दी भी हो तु हमेशा से ही।
सही कहता हूं बिल्ली तुझको
काटती है जो मेरी बात कही।।
बहन
बिल्ली मत कहा कर भाई मुझे
आगे से मैं तुझे उल्लू नई कहूंगी।
पर लड़े बगैर नींद नहीं आती है
कभी कभी तो जरूर लड़ा करूंगी।।
भाई
ठीक, बांध दो राखी मेरे पैरों पर
सदा मुस्कराती रह दुया यही है।
आज से वो सब तुम करती जाओ
जो तेरे और सब के लिए सही है।।
बहन
ठीक है भैया, तेरे बताए रास्ते पर
सदा चली हूँ, आगे भी चलती रहूंगी।
तेरे जैसे मन का भाई रब सबको दे
बस रब से सदा यही दुया करूंगी।।
सुखचैन मेहरा #9460914014

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