मेरा मन व्याकुल , है तन स्तब्ध
हीये में हलचल सी मचा रहे है।
बसन्त ऋतु के आगमन पर
है सखी, मेरे पिया घर आ रहे है।।
चूड़ियां खनकाऊँ, कुमकुम सजाऊँ
वो मेरे अन्तर्मन के भाव जगा रहे है।
बसन्त ऋतु के आगमन पर
है सखी, मेरे पिया घर आ रहे है।।
अजीब सी खुशी,अजीब तड़फ
न जाने इतनी देर क्यूँ लगा रहे है?
बसन्त ऋतु के आगमन पर
है सखी, मेरे पिया घर आ रहे है।।
न आँगन ठहरूँ ना तोरण ठहरूँ
बेचैन मन की व्यकुलता बड़ा रहें है।
बसन्त ऋतु के आगमन पर
है सखी, मेरे पिया घर आ रहे है।।
इंतजार खत्म, आ गये पिया
तोरण खड़े मंद मंद मुस्करा रहे।
बसन्त ऋतु के आगमन पर
है सखी, मेरे पिया घर आ गये है।
कर पिया दर्शन, मन हुआ प्रसन्न
वो मेरी हृदय सम्पन्दन बढ़ा रहे है।
बसन्त ऋतु के आगमन पर
जा सखी, मेरे पिया घर आ रहे है।।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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