May 30, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments

दोस्ती हो तो ऐसी (ख़ास रिश्ता)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ें*


नई-नई दोस्ती हुई थी मन में था कि मेरे नये दोस्त कैसे होंगे| सभी दोस्तों ने घुमने का मन बनाया | ये मेरे बाकि दोस्तों के लिए गुमने का अवसर था लेकिन मेरे लिए परीक्षा की घड़ी | क्योंकि मेरे पास इतने पैसे भी नहीं थे कि उनकी साझेदारी में शामिल हो सकूं | लेकिन फिर भी मैंने फ़ीस वाले पैसों से मैंने भी दोस्ती का एक हाथ आगे बड़ा दिया| ट्रिप की बुकिंग हो चुकी थी बस कन्फर्म करना बाकि था | वो भी हमारा एक दोस्त कन्फर्म करने के लिए निकल गया और हम सब ट्रिप पर जाने की तैयारी करने लगे मेरे आगे तो वो फ़ीस वाले पैसे घूम रहे थे लेकिन मैंने भी दिल बड़ा करते हुये मन समझा लिया और खुश था उत्साहित था ट्रिप पर जाने के लिय | मेरे सब दोस्तों को पता नहीं था कि मैंने ये पैसे अपनी फ़ीस वाले पैसों से दिये है| हम लोग तैयार होकर हमारी गाड़ी से चल पड़े एअरपोर्ट की ऑर सारे हंसी ख़ुशी एक दुसरे से मस्ती करते हुये जा रहे थे | कभी किसी का मोबाइल छीन लेना तो कभी किसी पीछे से आंखे बंद कर देना | फिर अचानक मेरे पेट में जोर-जोर से दर्द होने लगा जो अक्सर मुझे होता था |सभी दोस्तों की ख़ुशी चिंता में बदल गयी | अभी घर से थोड़ी दूर ही आगे निकले थे | हॉस्पिटल दूर था तो मेरे किसी दोस्त ने डॉक्टर को ही घर बुला लिया | मुझे पता था की अब मैं एक हफ्ते के लिए तो कहीं नहीं जा सकता|  मोबाइल में बनी विडियो देख मेरी आँखों में पानी आ गया |
मैंने डॉक्टर को अपने पास बुलाया और डॉक्टर को कहकर दोस्तों को बाहर भिजवा दिया|
मैं: डॉक्टर कितने दिन लगेंगे मुझे ठीक होने में ? मैंने पूछा |
डॉक्टर : कम से कम एक हफ्ता तो रेस्ट करना ही पड़ेगा |
मैं : अरे नहीं डॉक्टर ये विडियो देख कितने खुश थे मेरे दोस्त और अब देख (मैंने अपने उदास दोस्तों की ओर इशारा करते हुए कहा) सच मुच ये देख मेरी आँखों में आंसू आ गये | मैंने डॉक्टर के आगे गिरगिराने लगा कभी डॉक्टर के पैरों में पडू तो कभी उसके हाथ को पकडकर मुझे यहाँ से फ्री करने की बात कहूँ | किन्तु डॉक्टर नहीं माना कहने लगा, ‘अरे तेरी जान को खतरा है तुझे एक हफ्ते तो आराम करना ही होगा| मैं कुछ नि जनता डॉक्टर  (मैं अभी भी डॉक्टर के पैरों में ही था) डॉक्टर प्लीज मैं अपने दोस्तों को ऐसी हालत में नहीं देख सकता डॉक्टर साहब कुछ करो आप .मैंने अपने टिकेट कन्फर्म करने गये दोस्त को फ़ोन मिलाकर पूछा, टिकेट कन्फर्म हो गयी क्या? मैंने उसे रोते हुए पूछा  | उसने कहा हां हो गयी है| (मैं रोने लग गया)| वो कहने लगा अरे तूं रो क्यूँ रहा अरे क्या हुआ मैं अभी आया तेरे पास कहाँ हो आप  | मैंने कहा घर पर | वो जल्दी से हमारे पास पहुँच गया |  तुम्हें मुझे अभी फ्री करना ही होगा डॉक्टर बस  | मेरे दोस्त भी कमीने थे उन्होंने हमारी सारी बाते सुन ली थी पीछे की खिड़की| डॉक्टर जब ये बात उन्हें बताने लगा तो हमारे दोस्तों ने उन्हें पहले ही कह दिया कि हमारी दोस्ती के बीच में कभी मत आना | अब बोलो मेरा दोस्त कितने समय में ठीक हो जाएगा | डॉक्टर ने जब मेरी तरफ देखा तो मैं समझ गया कि उन्हें सब पता चल गया है तो मैंने इशारे से मना कर दिया |
अरे तूं इतना प्यार करता है रे हमें | अरे तेरे लिए पैसे तो क्या ये जान भी हाजिर है (वो मुझे गले लगाकर रोने लग गया)| तूं एक बार ठीक हो जा बस | मैं मेरे दोस्तों को  यूँ प्यार लुटाते देख मेरी आँखों में भी ख़ुशी के आंसू टपक पड़े |
कुछ दिन बाद जब मैं बिल्कुल ठीक हो गया (इस बीच उन्होंने मेरी बहुत केयर की) तो हम सब घुमने निकल गये अपनी ही गाड़ी से खूब मस्ती की | वास्तव में दोस्ती हो तो ऐसी |
लेखक: सुखचैन मेहरा सम्पर्क सूत्र: 9460914014

May 29, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments

रात परदेशी  (एक नारी अंतरात्मा की तड़फ)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ें*
डायरी लिखने में मग्न राज के कानों में एक आवाज पड़ी, ‘बेटा तेरे पापा कहाँ है’ राज ने कोई जबाब नहीं दिया, दुबारा पूछने पर..... उसने बिना पीछे देखे कह दिया, ‘माँ, पापा तो ड्यूटी पर है न अपनी... आपको तो पता ही है.’| फिर अचानक राज को याद आया माँ तो गाँव गई हुई है तो ये कौन है..? राज ने पीछे मुडकर देखा तो कोई नहीं था वो थोड़ा घबरा गया था | तुम घबराओ मत मैं तुझे कोई नुकसान नहीं पहुँचाने आयी हूँ | मैं तो तुम्हें सिर्फ ये बताने आयी हूँ की रात का एक बज रखा है तेरी औरत तेरा इंतजार करती सो गई लेकिन तू अभी तक ये डायरी लिख रहा है|
राम : तो आप कौन हो..(राज ने चारों ऑर नजर घुमाते हुये सहमी सी आवाज में बोला)?
आत्मा : मैं आज से 5 साल पहले इधर पास ही गाँव में किसी गैर के साथ पकड़ी गयी थी तो गाँव वालों ने मुझे गाँव से निकाल दिया और मैंने शहर आ कर रेलगाड़ी के आगे कूद कर अपनी जान दे दी | मेरा पति हमेशा बाहर रहता था| महीनें में दो-तीन दिन ही घर आता था | अब तुम तो लेखक हो तुम्हें तो सब मालूम है कि पति दिन परदेशी हो तो चल जाता है लेकिन रात परदेशी हो तो बुरा हाल हो जाता है एक औरत का यही कहने आई थी | आपकी पत्नि को देख मुझसे रहा नी गया और में आ गयी अब मैं हर घर जाकर ये सन्देश दूंगी तू मेरी इस कहानी को लिखेगा ना|
राम : हां जरुर (राज ने जबाब दिया)
अब पता चला वह कोई बुरी आत्मा नी थी एक नारी के अंतरात्मा थी :
      अब डायरी लिखना बंद करके वो सीधा अपने कमरे में गया और उसके बाद से कभी 10 बजे से ऊपर उसने डायरी या अन्य काम नहीं किया |
                        लेखक: सुखचैन मेहरा सम्पर्क सूत्र: 9460914014
May 21, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments

चुन्नी (इज्जत दा सिरमोर)
*दो मिनट दा टेम कढ के जरुर पढयो *
पुरे पांच साल बाद सरपंच दी धी कनेड़ेयों पंजाब आ पहुंची सी| राह बीच पंजाब दे हरे-भरे खेतां नूं देख के  hoo.... hoo...So... Nice.... करदी आवे | रात ता उहने किसे न किसे तरह गुजार लई लेकिन सवेर हुंदे ही अपने बापू नूं कहन लगी, Dad…I want to see our farm. | बापू ले आया खेता नूं..... आसे पासे डे खेता नूं वेख के इनी खुश हो रही सी कि बस उहनूं जन्नत मिल गई होवे...कदे बापू नूं चुम्म लवे ते कदे भरा नूं जफ्फी पा लवे| बापू नूं फ़िक्र सी कि उहनूं एथो दा वातावरण फब्बे गा के नहीं | लेकिन हुन तक सब ठीक सी | लोक खड़-खड़ देखन इस विदेशों आई धी नूं| उसदे जीन टॉप पाया वेख कदे अपने आवदे कपड़ेयां वल वेखन ते कदे उस दे | लो जी खेत वी आ गया सी | जीन ते पख्ड़े दे कंढे चिपकी जान ते ओह वी थोड़ा खुजला के अगे वद्दी जांदी सी | सारा ध्यान ता खेता वल सी एस करके ता किसे पहाड़ी कीकर च अड़ जे उस दा टॉप पिछों कमर तो लेके उते टूही तक फट गया | बाद विच वेखे इधर-उधर | नाल ही कम कर रही एक पंजाबी मुट्यार ने अपनी लम्बी चुन्नी दे दो टुकड़े कर एक आप ले लिती ते दूसरी कातर नाल उस कनेडे वाली दा तन ढक दिता | पंजाबी मुट्यार कहन्दी दीदी जी सिर ते चुन्नी लेके रख्या करो एही अपनी इज्जत है| कनेड वाली उस मुट्यार दे मुं वल वेखे के नीवीं पा गई | शायद उस मुट्यार जो पंजाबी च केहा सी ता कुछ नी पल्ले प्या लेकिन चुन्नी दा महतो जरुर समझ गयी सी | उस तो बाद थल्ले ता पांवे जीन टॉप पा लेंदी लेकिन चुन्नी दा सरताज ता हमेशा उस दे सिर ते रहन्दा सी |
      सचमुच चुन्नी दा रोल एक औरत, धी, दे जीवन विच उम्दा रोल निभोंदी है| तुहानू मेरी ऐ कहानी किवें दी लगी कमेंट करके जरुर दस्यो...
                                        लेखक: सुखचैन मेहरा सम्पर्क सूत्र: 9460914014 
May 17, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments

लेटेस्ट हमसफ़र ......(भाग 1)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ें*
राम को पैसो के लिए छोड़ने के बाद राम का रिश्ता एक अच्छे घर में हो गया | राम का कारोबार दिन प्रतिदिन बढ़ने लगा | अब अच्छा पैसा भी था और एक प्यारा सा जीवनसाथी भी मिल गया था | एक दिन राम अपनी कार से कहीं जा रहा था | रास्ते में एक नकाबपोश लड़की ने लिफ्ट मांगी | राम ने कार रोक उन्हें लिफ्ट दे दी | लड़की को बैठते ही पता नहीं क्या हो गया उन्हें गाड़ी रोकने के लिए कहने लगी | (उन्होंने नकाब अभी भी पहना हुआ था) | राम ने कार रोक दी | लड़की ने जब राम से सॉरी बोला तो वह लड़की की आवाज पहचान कर बोला अरे! प्रीति तुम.....| आयो कोई बात नहीं तुम्हें आगे तक छोड़ देता हूँ | प्रीति कार में बैठ गयी| प्रीति ने उसे जिजकते लब्जों से पूछा... कैसे हो आप? | मैं तो ठीक हूँ आपके सुनाओ...| मैं भी ठीक हूँ | क्या बात आप अकेले और नकाब तो आप कभी पहनते ही नहीं थे |
प्रीति :       मैं घर से भागकर आयी हूँ | (प्रीति ने नकाब उतारते हुये कहा)
राम  :       क्यों..? और ये नकाब वापस पहन लो प्लीज्..
प्रीति :       मेरे मम्मी-पापा मेरी मर्जी के खिलाफ रिश्ता कर आये और आज वो मुझे
            देखने के लिए आने वाले है|
राम :        अरे पागल, तेरे माँ-बाप का क्या होगा |
प्रीति :       वो मैं नही जानती.. बस मैं उसी से शादी करूंगी जिसे मैं चाहती हूँ|
राम :        कौन है वो बेचारा..... |
प्रीति :       तुम |
राम :        तुमने तो मुझे मना कर दिया था न.....
प्रीति :       मैंने मेरी मम्मी पापा के कहने पर आपको न की थी.
राम : अब बहुत देर हो चुकी है प्रीति अब कुछ नहीं हो सकता, मैं अपने लेटेस्ट हमसफ़र के साथ खुश    हूँ और मेरे ख्याल से तुम्हें भी अभी अपने लेटेस्ट हमसफ़र के साथ ही खुश रहना चाहिए|
प्रीति कुछ नहीं बोली....हां राम की यह बात सुनकर उसकी आखों में आंसू जरुर निकल आये.....
(राम प्रीति को वापिस उसके घर छोड़ आया | रिश्ते के बाद शादी भी हो गयी | आज राम अपने लेटेस्ट हमसफ़र के साथ खुश है और प्रीति अपने......| मुझे लगता है कहीं न कहीं ये सही भी है जो हो गया सो हो गया | अब जो है उसी से गुजारा करो | हां जिसे आप चाहते हो उसे पाने की हर संभव कौशिश करो लेकिन जिद नहीं..| किस्मत खट्टी है कह कर आगे बढ़ जायो.....| मेरी ये कहानी आपको कैसे लगी कमेंट कर जरुर बताना.....
लेखक: सुखचैन मेहरा सम्पर्क सूत्र: 9460914014 

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