ये कैसी हवा?
पता नहीं आजकल की हवा को हो क्या गया है.. जब देखो जान लेने-देने की बातें करती रहती है |
1. बच्चों की अपने माँ-बाप की अवज्ञा करने की हवा ने तो इतना जोर पकड़ रखा है कि माँ-बाप रोज खुदखुशी करने की नई नई योजनायें सोचते रहते है | लेकिन अपनी समझदारी के कारण बच जाते है| जिस दिन इनकी ये समझदारी ख़त्म हो गयी उस दिन कोई नहीं बचा पायेगा इन्हें | बताओ क्या मिलेगा बच्चों को यदि ऐसा हो गया तो...?
2. पति-पत्नी के बीच अनबन की हवा भी कम नही है | शादी से पहले क्या सोचते हैं... शादी के बाद कुछ और ही हो जाता है..| पति-पत्नी एक दुसरे पर शक करने लग जाते है | बैठ के समझने समझाने का प्रयत्न दोनों में से कोई भी नहीं करता | आखिर बात तलाक तक पहुँच जाती है या दोनों में से एक भगवान को प्यारा हो जाता है|
3. भ्रस्टाचार की इस हवा ने भी तो पुरे देशवासियों के नाक में दम कर रखा है | कर्ज में डूबा किसान सरकार को कोस रहा है और सरकार हर साल अपनी उपलब्धियां गिना कर नो दो ग्यारह हो जाती है फिर एक साल तक कोई फरमान नज़र नहीं आता | भ्रस्टाचार की इस खतरनाक हवा के कारण तो किसानों तक कोई सुविधा नहीं पहुँच पाती | नतीजा किसान अपने ही खेत के वृक्ष के नीचे लटके हुये मिलते है | सरकार अपना काम सही सिस्टम से करे तो ऐसा क्यों हो...? | पर सरकार की क्या गलती सरकार भी तो हम लोग ही चुनते है जिसमें फांसी के फंदे पर लटकने वाले किसान भी शामिल होते है |
4.दुष्कर्म वाली हवा ने तो कहर ही मचा रखा है | ये सिर्फ बच्चियों की ही नहीं बल्कि पूरी इंसानियत को ही एक-एक करके मार रही है| असीफ़ा वाले केस को ही देख लो अभी एक महिना भी नहीं हुआ कि सबकी अंतरात्मा और सहानुभूति मर गयी वो उबाले खाता हुआ खून भी पानी बन गया |
जब तक अपनी बच्ची की हिफ़ाजत हम स्वंय नहीं करेंगे तब तक क्या ये हवा रुकनेवाली है|
इन्हें थामना होगा हमे बच्चों को अपनी माँ-बाप की माननी पड़ेगी|
पति-पत्नी को एक-दूसरे के प्रति विश्वास रखना होगा और सरकार को अपना काम पूरी ईमानदारी से करना होगा |
सबसे जरूरी है परिजनों को स्वंय अपनी नन्हीं परियों की हिफ़ाजत करनी होगी |
ये पोस्ट आपको कैसी लगी कमेंट्स कर जरुर बताना.....
लेखक: सुखचैन मेहरा

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