May 21, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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चुन्नी (इज्जत दा सिरमोर)
*दो मिनट दा टेम कढ के जरुर पढयो *
पुरे पांच साल बाद सरपंच दी धी कनेड़ेयों पंजाब आ पहुंची सी| राह बीच पंजाब दे हरे-भरे खेतां नूं देख के  hoo.... hoo...So... Nice.... करदी आवे | रात ता उहने किसे न किसे तरह गुजार लई लेकिन सवेर हुंदे ही अपने बापू नूं कहन लगी, Dad…I want to see our farm. | बापू ले आया खेता नूं..... आसे पासे डे खेता नूं वेख के इनी खुश हो रही सी कि बस उहनूं जन्नत मिल गई होवे...कदे बापू नूं चुम्म लवे ते कदे भरा नूं जफ्फी पा लवे| बापू नूं फ़िक्र सी कि उहनूं एथो दा वातावरण फब्बे गा के नहीं | लेकिन हुन तक सब ठीक सी | लोक खड़-खड़ देखन इस विदेशों आई धी नूं| उसदे जीन टॉप पाया वेख कदे अपने आवदे कपड़ेयां वल वेखन ते कदे उस दे | लो जी खेत वी आ गया सी | जीन ते पख्ड़े दे कंढे चिपकी जान ते ओह वी थोड़ा खुजला के अगे वद्दी जांदी सी | सारा ध्यान ता खेता वल सी एस करके ता किसे पहाड़ी कीकर च अड़ जे उस दा टॉप पिछों कमर तो लेके उते टूही तक फट गया | बाद विच वेखे इधर-उधर | नाल ही कम कर रही एक पंजाबी मुट्यार ने अपनी लम्बी चुन्नी दे दो टुकड़े कर एक आप ले लिती ते दूसरी कातर नाल उस कनेडे वाली दा तन ढक दिता | पंजाबी मुट्यार कहन्दी दीदी जी सिर ते चुन्नी लेके रख्या करो एही अपनी इज्जत है| कनेड वाली उस मुट्यार दे मुं वल वेखे के नीवीं पा गई | शायद उस मुट्यार जो पंजाबी च केहा सी ता कुछ नी पल्ले प्या लेकिन चुन्नी दा महतो जरुर समझ गयी सी | उस तो बाद थल्ले ता पांवे जीन टॉप पा लेंदी लेकिन चुन्नी दा सरताज ता हमेशा उस दे सिर ते रहन्दा सी |
      सचमुच चुन्नी दा रोल एक औरत, धी, दे जीवन विच उम्दा रोल निभोंदी है| तुहानू मेरी ऐ कहानी किवें दी लगी कमेंट करके जरुर दस्यो...
                                        लेखक: सुखचैन मेहरा सम्पर्क सूत्र: 9460914014 

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