May 17, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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लेटेस्ट हमसफ़र ......(भाग 1)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ें*
राम को पैसो के लिए छोड़ने के बाद राम का रिश्ता एक अच्छे घर में हो गया | राम का कारोबार दिन प्रतिदिन बढ़ने लगा | अब अच्छा पैसा भी था और एक प्यारा सा जीवनसाथी भी मिल गया था | एक दिन राम अपनी कार से कहीं जा रहा था | रास्ते में एक नकाबपोश लड़की ने लिफ्ट मांगी | राम ने कार रोक उन्हें लिफ्ट दे दी | लड़की को बैठते ही पता नहीं क्या हो गया उन्हें गाड़ी रोकने के लिए कहने लगी | (उन्होंने नकाब अभी भी पहना हुआ था) | राम ने कार रोक दी | लड़की ने जब राम से सॉरी बोला तो वह लड़की की आवाज पहचान कर बोला अरे! प्रीति तुम.....| आयो कोई बात नहीं तुम्हें आगे तक छोड़ देता हूँ | प्रीति कार में बैठ गयी| प्रीति ने उसे जिजकते लब्जों से पूछा... कैसे हो आप? | मैं तो ठीक हूँ आपके सुनाओ...| मैं भी ठीक हूँ | क्या बात आप अकेले और नकाब तो आप कभी पहनते ही नहीं थे |
प्रीति :       मैं घर से भागकर आयी हूँ | (प्रीति ने नकाब उतारते हुये कहा)
राम  :       क्यों..? और ये नकाब वापस पहन लो प्लीज्..
प्रीति :       मेरे मम्मी-पापा मेरी मर्जी के खिलाफ रिश्ता कर आये और आज वो मुझे
            देखने के लिए आने वाले है|
राम :        अरे पागल, तेरे माँ-बाप का क्या होगा |
प्रीति :       वो मैं नही जानती.. बस मैं उसी से शादी करूंगी जिसे मैं चाहती हूँ|
राम :        कौन है वो बेचारा..... |
प्रीति :       तुम |
राम :        तुमने तो मुझे मना कर दिया था न.....
प्रीति :       मैंने मेरी मम्मी पापा के कहने पर आपको न की थी.
राम : अब बहुत देर हो चुकी है प्रीति अब कुछ नहीं हो सकता, मैं अपने लेटेस्ट हमसफ़र के साथ खुश    हूँ और मेरे ख्याल से तुम्हें भी अभी अपने लेटेस्ट हमसफ़र के साथ ही खुश रहना चाहिए|
प्रीति कुछ नहीं बोली....हां राम की यह बात सुनकर उसकी आखों में आंसू जरुर निकल आये.....
(राम प्रीति को वापिस उसके घर छोड़ आया | रिश्ते के बाद शादी भी हो गयी | आज राम अपने लेटेस्ट हमसफ़र के साथ खुश है और प्रीति अपने......| मुझे लगता है कहीं न कहीं ये सही भी है जो हो गया सो हो गया | अब जो है उसी से गुजारा करो | हां जिसे आप चाहते हो उसे पाने की हर संभव कौशिश करो लेकिन जिद नहीं..| किस्मत खट्टी है कह कर आगे बढ़ जायो.....| मेरी ये कहानी आपको कैसे लगी कमेंट कर जरुर बताना.....
लेखक: सुखचैन मेहरा सम्पर्क सूत्र: 9460914014 

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