Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 17, 2018 with No comments
तिरंगे की शान
कुछ पल याद आते है हमें
जब देश मे जंग लगी थी।
घर पर सुरक्षित थे हम सब
सरहद, मौत के संग लगी थी।।
वो तिरंगे में लिपटी लाशें
मचा था हर तरफ कोहराम।
वो देखा था मौत का मंजर
1857 का स्वतंत्रता संग्राम।।
वीरता से लड़ रहे थे वीर
घर जैसे था ही नहीं उनका।
हां,देश ही देश दिख रहा था
कुल तो जैसे नही था उनका
तिरंगे की शान बचाने को
जान न्यौछावर कर गए वो।
जुग - जुग याद आएंगे लाल
नाम देश का कर गए जो।।
आओ आज याद करें हम
सरहदी वीर जवानों को।
जिन्होंने दुश्मन से डरकर
नही छोड़ा था मैदानों को।।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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