November 16, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 16, 2018 with No comments

बचपन

अब कभी मत रूठना ऐ मन मेरे
बचपन चला गया है
अब तो कोई  लापरवाही
नहीं चलने वाली
क्योकि बचपन.... चला गया है।
जिंदगी में तेरे लिए जो
मां बाप ने देखे है सपने।
उन्हें पूरा कर
अब तुझमे बचपना नही रहा।
याद तो आती होगी
बचपन के हसीं पलों की
जहन में छवि तो बनती होगी।
उन बचपन वाले मित्रों की।
पर अब क्या फायदा
क्योकि बस यादें ही बाकी है
बचपन तो रहा है नहीं

स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014


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