November 06, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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भैया दूज

बांधे स्नेह बहन भाई को
कोई स्वार्थ नहीं है मन में।
शायद ही कोई रिश्ता हो
हमारे इस स्वार्थी जग में।।

भैया  दूज पर  उमड़  पड़ा
भाई बहन का  प्यार  देखो।
लड़ना,  झगड़ना  बना रहे
भाई बहन का संसार देखो।।

लंबी उम्र  की दुया करती  है
बहन 'भैया दूज' का व्रत कर।
बदले में भाई    भी  बहन को
सम्मान देता है उपहार देकर।।

यम को यमुना ने स्नेह बांधा
करवाया था,  भरपेट  भोज।
स्नान कर   यमुना  नदी  में
हुए पाप से मुक्त पापी लोग।।

एक मान्यता ये भी है जब जो
बहन के हाथ का भोज खाए।
वह भाई खुश नसीब है और
धन धान्य से परिपूर्ण हो जाए।।

सुखचैन मेहरा # 9460914014


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