November 20, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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शब्द संग अर्थ

वर्ण से वर्ण मिला तूने  शब्द तो  बना लिया
अभी उन शब्दों का अर्थ समझना बाकी है।

लिख  डाली है  पंक्ति  "सोच अपनी-अपनी"
सहमति है, या स्वार्थीपन, समझना बाकी है।

गहराई में डूब गए गर  तुम  निकल न पयोगे।
कैसे पार करेंगे शब्दसागर, समझना बाकी है।

कुछ शब्द 'ठोकर' से है, कुछ वजह है जीने की
पर है कौन कौनसे वो  शब्द,  समझना  बाकी है।।

कुछ शब्द 'अहिंसा' से है, कुछ हिंसा के रखवाले।
हम किन शब्दों को  अपनाएं, समझना  बाकी है।।

कुछ शब्दों में  संसार  तो कुछ  में  है अकेलापन।
आप समझो, मेरे लिए तो 'माँ' शब्द ही काफी है।।

स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014


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