Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on November 09, 2018 with No comments
भैया दूज का त्यौहार
देखो 'भैया दूज' का त्यौहार
लेकर आया है असीम प्यार।
भाई का जीवन सुखमय हो,
बहनों की बस यही है चाह।।
यूं तो खुश हैं परेशान करके
नहीं देख सकते परेशानी में।
हा ये रिश्ता है ही कुछ ऐसा
द्वंदता बनी रहती है कहानी में।
जब दोनों संग होते है तो
एक बार जरूर झगड़ते है।
कोई बात मनवानी हो तो
मिनतें, पैर तक पकड़ते है।।
उमंग से भरा आज का दिन
भाई की लंबी उम्र की चाहत।
जब नसीब में न हो बहन,तब
भावनाएं भी होती है आहत।।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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