Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on January 03, 2018 with No comments
टाईम टेबल (एक हिन्दी लघू-कथा)
हमारे घर में दो दादा-दादी, मम्मी-पापा व हम दो भाई रहते है। मेरा भाई मेरे से छोटा है। मैं अपनी एम सी ए की पढ़ाई पुरी कर अभी पिछले महीने ही घर आया हुं। पिछले कुछ दिनों से देख रहा था कि मेरे दादा-दादी कुछ उदास-उदास से लग रहे थे। एक दो बार मैंने इग्नोर कर दिया लेकिन आज कुछ ज्यादा ही परेशान लग रहे थे। मेरे पूछने पर उन्होंने कुछ नहीं बताया।
कुछ दिन बाद घर की दादा-दादी संबन्धी गतिविधियों पर ध्यान देने पर मुझे पता चला कि मेरे मम्मी पापा ने दादा-दादी जी को एक टाइम-टेबल के अनुसार ही खाना पानी देते थे। इस बीच इस वे उन पर कोई ध्यान नहीं देते थे। चाहे दादा-दादी को भूख पहले लग जाये लेकिन खाना रात के ठीक 09ः00 बजे ही आता था।
जब मेरी मां खाना बना देते तो उसके बाद उन्हें खाना मैं ही परोस्ता था। तो मैनें उनका भी टाईम टेबल भी सेट कर दिया। आज खाना समय पर नहीं पहुंचने पर पापा ने मुझे खाना परोसने के लिए आवाज लगाई। मैने कहा पापा मैने अपना टाईम टेबल बदला है। आज से आपको ठीक साढे़ नौ बजे खाना परोसा जायेगा। पापा बोले, ‘बेटा भूख तो अभी लगी पड़ी है’। फिर मैने पापा से कहा, ‘दादा-दादी को भी लगती है। भूख तो । इतना कहते ही मेरे पापा ने दादा-दादी के कमरे में गये और उनसे माफी मांगी और आगे से जो जब भी उन्हें कुछ चाहिए तो उन्हे देने का वादा किया। अब दादा-दादी बहुत खुश रहनें लगे थे।
लेखक : सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र:- 9460914014
(यह कहानी यर्थात मालूम होती है लेकिन पुर्णतयः काल्पनिक है।)
हमारे घर में दो दादा-दादी, मम्मी-पापा व हम दो भाई रहते है। मेरा भाई मेरे से छोटा है। मैं अपनी एम सी ए की पढ़ाई पुरी कर अभी पिछले महीने ही घर आया हुं। पिछले कुछ दिनों से देख रहा था कि मेरे दादा-दादी कुछ उदास-उदास से लग रहे थे। एक दो बार मैंने इग्नोर कर दिया लेकिन आज कुछ ज्यादा ही परेशान लग रहे थे। मेरे पूछने पर उन्होंने कुछ नहीं बताया।
कुछ दिन बाद घर की दादा-दादी संबन्धी गतिविधियों पर ध्यान देने पर मुझे पता चला कि मेरे मम्मी पापा ने दादा-दादी जी को एक टाइम-टेबल के अनुसार ही खाना पानी देते थे। इस बीच इस वे उन पर कोई ध्यान नहीं देते थे। चाहे दादा-दादी को भूख पहले लग जाये लेकिन खाना रात के ठीक 09ः00 बजे ही आता था।
जब मेरी मां खाना बना देते तो उसके बाद उन्हें खाना मैं ही परोस्ता था। तो मैनें उनका भी टाईम टेबल भी सेट कर दिया। आज खाना समय पर नहीं पहुंचने पर पापा ने मुझे खाना परोसने के लिए आवाज लगाई। मैने कहा पापा मैने अपना टाईम टेबल बदला है। आज से आपको ठीक साढे़ नौ बजे खाना परोसा जायेगा। पापा बोले, ‘बेटा भूख तो अभी लगी पड़ी है’। फिर मैने पापा से कहा, ‘दादा-दादी को भी लगती है। भूख तो । इतना कहते ही मेरे पापा ने दादा-दादी के कमरे में गये और उनसे माफी मांगी और आगे से जो जब भी उन्हें कुछ चाहिए तो उन्हे देने का वादा किया। अब दादा-दादी बहुत खुश रहनें लगे थे।
लेखक : सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र:- 9460914014
(यह कहानी यर्थात मालूम होती है लेकिन पुर्णतयः काल्पनिक है।)

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