Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on March 29, 2018 with No comments
बढ़ रही हैं दूरियां (आज का सच)
5*दो मिनट उका समय निकालकर जरुर पढ़ना*
बढ़ रह् ह्7 दूरियां,
कुछ मेरी बेसमझी से
तो कुछ तेरी नादानियों से |
तेरा बार-बार 7Ysorry! के दोहराव से मैं
हैरान हूँ तेरी इन हरकत बचकानियों से
बढ़रही हैं यमKLओ667आई86दूHरियांIK99केR,
कुछ मेरी बेसमझी से
तो कुछ तेरी
नादानियों से |
iHH7ह्7
प्यार के मामले मेंल बेसमझ हूँ ये ख्याल
रखना
क्या ता कब शक के लपेटे में आ
जाओ......|
आपकी..... रोज-रोयHमक6जजज की
j बढ़ रही हैं दूरियां,किल88कुह्6ह्IJ मेरी बेसमझी सेजबनमयमBय
तो
कुछ तेरी नादानियों से |
छोडनी होगी मुझे
मेरी बेसमझी और तुम्हें नादानियाँ
बिगड़ते देखी हैं
मैनें लोगों की बनी बनाई कहानियां |
कोई नहीं बच पाया
आज तक इन तानातानियो से
बढ़ रही हैं दूरियां,
कुछ मेरी बेसमझी से
तो कुछ तेरी
नादानियों से |
लेखक : सुखचैन
मेहरा, 9460914014जग्य

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