March 02, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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होली के रंग तेरे संग (होली स्पेशल)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना*
आज सुबह से भी महमानों की आवा-जावी लग गयी | सब सफेद लिवाज में काफी अच्छे लग रहे थे जैसे  “हमारे भारत की संस्कृति” की प्रदर्शनी लगी हो हर घर में | इस होली पहली बार किसी के साथ मन से होली खेलने का जी हो रहा था | तभी तो मैं दो दिन पहले ही छुट्टी लेकर घर आ गया था | खबर मिली की वो नहीं है यहाँ... तो अच्छा नहीं लगा | लेकिन आज उदास होने का दिन थोड़े था तो मैंने उदास होने की बजाये उसकी एक तस्वीर ली और लकड़ी पर कपड़े को सिलकर हाथ बनाये | हाथो में रंग थमा दिया अपने घुटनों के बल बैठ कर रंग भी लगवाया और लगा भी दिया | सच में ऐसा लग रहा था की वह मेरे पास ही है दूर नहीं | बस इतने में मेरी चाह पूरी हो गयी और मैं हमेशा की तरह बाहर होली खेलने नहीं गया |  (काल्पनिक)
                             लेखक: सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र :- 9460914014           

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