March 24, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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जल क्यों रही है दुनियां (खुली कविता)
             *दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़े*
जब हम दर-दर की ठोकरें
खा रहे थे बहुत खुश  थी दुनियां,|
आज हमारी राह साफ़ देखकर
अब जल क्यों रही है दुनियां ||

                    पहली ठोकर पर मुस्कराई
                   दूसरी पर तो ठहाका ही लगा दिया
                   आज हमारी ऊंचाईयों को देख
                   कर मसल क्यों रही है दुनियां ||

पता है कौशिश अपने बनने की है
उनकी नजर हमारी शोहरत पर है |
पता नहीं अब हर मुश्किल में हमारे
साथ चल क्यों रही है दुनियां ||
                 बड़ी मुश्किल से मुकाम हासिल हुआ है
                 सुखचैन सब को साथ मिलाकर चल
                अब समझ जा कि चीन की नीतियों
                 पर चल क्यों रही है दुनियां ||
 
-:-सुखचैन मेहरा, 9460914014-:-

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