Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on March 17, 2018 with No comments
सहेली का दखल ( हिंदी प्रेम कथा)
दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़े
आज सुबह-सुबह व्हाट्सएप्प पर रूही ने अपने क्लासमेट का sad स्टेटस पढ़
कर उससे उसका कारण पूछा तो उसने बताया की बीते कल उसकी राजी की सगाई हो गयी है |
रूही ने राजी से बात की
रूही : राजी, देव तो पागल हो रखा है तेरे कारण | दिन-रात sad स्टेटस लगाता
रहता है |
राजी : रूही, मैं भी उसे बेइंतहा चाहती हूँ लेकिन अब कुछ नी हो सकता |
रूही : क्या तुम उसके बिना खुश रह पायोगी..... ?
राजी : हां....(उदास मन से) |
रूही : देख राजी तुम्हरे चेहरे की उदासी चीख-चीख कर कह रही है कि तूं उसे
भूली नहीं है अब तक
राजी : हां.....नहीं भूली हूँ लेकिंन मेरे मंगेतर भी बहुत प्यार करने
वाला मिला है सारा दिन हँसता रहता है |
रूही : पहला पहला होता है दूसरा दूसरा फिर पछताएगी तूं |
राजी : फिर तूही बता मैं क्या करूं....?
रूही : तूं कुछ मत करना मैं ही करती हूँ
राजी : क्या करेगी तूं कुछ उल्टा-सीधा मत कर देना
रूही : यार ये देख स्टेटस उसके ...............
राजी : ध्यान से देंखने लगती है
(रूही ने बिना राजी से पूछे उसके मंगेतर राज से
ये बात कह दी)
(राज ने राजी को मिलने के लिए बुलाया राजी आ गयी)
राज : नमस्ते !
राजी : नमस्ते.....
राज : क्या मैंने जो सुना वह सच है....?
राजी : हां............झुकी नजरों से |
राज : तो इसमें दिक्कत कहाँ आ रही है..?
(राजी
नजरें झुकाए खड़ी रही बस)
राज : शादी के बाद ना मैं खुश रह पाउँगा न आप | वैसे भी आपकी ख़ुशी में
ही मेरी ख़ुशी में अपने माँ-बाप को समझा
लूँगा | मेरा तो यह मानना है कि या तो प्यार करो मत और यदि करो तो उसे उस पार जरुर लगाओ | मैं सच कहता हूँ यदि ये बात मुझे शादी के बाद पता चलती तो मैं अपने आप को कभी माफ़ नहीं
करता क्योकि दुसरो की मुहब्बत को छिनकर आज तक कोई खुश नहीं रह पाया है इतिहास
गवा है |
राजी : थैंक्स राज तुमने मेरा कितना बड़ा काम कर दिया |
(अब सब कुछ ठीक हो गया देव व राजी की शादी हो गयी आज दोनों ख़ुशी से
जीवन बिता रहें है और राज भी)

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