October 26, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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  सरहद पर है चांद मेरा

सोभाग्यकांक्षी
सरहद पर है, मेरा चांद
वियोग मुझ पर है भारी।
करवाचौथ आया है पिया
घर आने की करो तैयारी।।

चिरंजीवी
कैसे भूल जाऊं फर्ज मेरा,
लाखों चाँदों की जिम्मेदारी।
सरहद से नहीं लौट पाऊंगा
मत करना प्रतीक्षा हमारी।

सोभाग्यकांक्षी
जला रही है वीरहाग्नि मुझे
बताओ कैसे मैं बच जाऊँ।
न दिन में चैन न रात को नींद
कैसे तुम बिन दिन बिताऊँ।।

चिरंजीवी
हिन्द वतन के है हम रखवाले
तुम हो एक भारतीय पतिव्रता।
कैसे कर दे हवाले दुश्मन के ,
हिन्द का एक छोटा सा टुकड़ा।।

सोभाग्यकांक्षी
खुश हूँ मैं तुम्हे प्यार है हिन्द से
मैं भी हूँ सरहदी शेर की नारी।
लाखों के सुहाग सुरक्षित रहें,
निभाये मेरा सुहाग जिम्मेदारी।।

चिरंजीवी
ओह! प्यारी आ रहा हूँ मैं घर
मख़ौल ज़रा सा किया है प्रिय।

सोभाग्यकांक्षी
आओ पिया तुम देर न लगाओ
इंतजार कर रही है छलनी प्रिय।

स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014


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