October 28, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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गुंजन: भाग तीसरा

वैसे तो काॅलेज खुले हुऐ काफी दिन हो गये थे लेकिन गुंजन का आज काॅलेज में पहला दिन था।

गुंजन ने काॅलेज के गेट में माथा टेकते हुए प्रवेश किया। पाठशाला को मंदिर समझने वाली गुंजन के लिए काॅलेज का वातावरण बिल्कुल अलग था। क्योंकि इक्की-दुक्की लड़कियों को छोड़कर सभी ने जिन्स टाॅप व चाम-चटकिले कपडे़ पहने हुये थे।

गुंजन ने जहां-जहां भी अपनी भी अपनी नज़र दौड़ाइ वह सब कुछ गुंजन के लिए सब नया था। जैसे एक लड़का-लड़की का बिल्कुल नजदीक बैठकर आपस में बातें करना, एक दूसरे को यार-यार... कहकर संबोधित करना सब कुछ।

गुंजन पढ़ाई के इस नये मंदिर में आकर बस मानो खो सी गई थी। फिर काॅलेज की कुछ सीनियर लड़कियों ने उसे ख्यालों की दुनियां से “ओ.....! हेल्लो मेम।” कहकर बाहर निकाला।

‘हेल्लो, मेम ध्यान किधर है आपका हमारे ऊपर चढोगी क्या। (वो ऐसा हुया ना ख्यालों में गुंजन इतना खो गई थी कि बस दो सेकण्ड की देरी हो जाती तो टकरा जाती।)
‘सॉरी! सॉरी!’ गुंजन ने जबाब दिया।
‘इधर आयो हमारे पिछे‘ । उनकी ग्रुप लिडर ने गुंजन को कहा।
‘जी!‘
‘यहां बैठो।‘ ( निचे बैठने को कहा)
गुंजन वहीं निचे घांस पर ही बैठ गई। गुंजन को यह सब थोड़ी देर बाद में समझ आया की यह उसकी रैगिंग पर है

‘क्या नाम है आपका? ‘

‘जी, गुंजन।‘

अरे! यह तो वही है जो जिलेभर में प्रथम आयी थी। उन में से किसी एक ने कहा।

अरे! हां यार । हम टाॅपर के साथ ऐसा बर्ताव  नहीं कर सकते।

यार! हम टाॅपर के साथ फन तो कर ही सकते है।
(सीनियरस् ने बगीचे में बैठे एक लडके की तरफ इशारा करते  हुये कहा।

गुंजन आपको हमारी एक और बात माननी पडेगी ।
‘जी बोलिये।’

लो ये पहन लो (गुंजन ने उनकी दी हुई आँखें व दान्त पहन लिये और उनके कहेनुसार उस लड़के की तरफ बढ़ने लगी।)

गुंजन को यह सब अजीब सा लग रहा था। क्योंकि सब लोग उसे देख कर हस रहे थे। वह लडका पार्कबैंच पर अकेला ही बैठा था और मैग्जीन पढ़ने में लीन था।

जब गुंजन चलते हुए उस लड़के के पास पहुंची तो किसी एक ने उसे उस लड़के पर धक्का दे दिया। अब उस लड़के सामने मैग्जीन की जगह गुंजन का भूतनी वाला चेहरा था। लड़का एक दम से घबरा गया था। क्योंकि उन्होनें इनके बाल भी खोल दिये थे।

उपर से गुंजन उस लड़के के डरे हुए चेहरे को देखकर जोर जोर से हंसने लगी । जिससे वह और ज्यादा डर गया। उस लडके को गुंजन की हंसने की आवाज एक भूतनी के हंसने जेैसे लग रही थी। हा..... हा...... हा.....ई...... ई....।

लड़का डर के मारे उठकर भागने लगा तो गुंजन ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया। तब उस लड़के ने अपने चारों ओर देखा तो उसे सब कुछ समझ आया कि ये उनसे फन कर रहे थेे। लड़का भी यह सब देखकर हंसने लगा।

अब काॅलेज के क्लासेज शुरू होने का समय हो गया था। सब लोग अपने अपने क्लास रूम में चले गये। क्लास में जाने के बाद पता चला की वह लड़का भी इसी क्लास में पढता है।

गुंजन लगातार उस लड़के की ओर देखकर  होंठ दबाकर हंस रही थी। वह अपनी हंसी रोक नहीं पा रही थी। लेक्चर ने गुंजन को देख उसे खड़ा होने को बोला। गुंजन थोड़ा घबरा गई थी।

‘पहला दिन है आपका’

‘जी सर।’

‘चलो बैठ जाओ। आगे से ध्यान रखना ।

‘ठीक है, सर।’  गुंजन बैठ गई।

क्लास में सिर्फ 15-20 छात्र-छात्राऐं  ही थे (कुछ अनुुपस्थित थे तो कुछ ने क्लास में ही नहीं आये)  जबकि 40 की तदार थी क्लास में तब गुंजन को पता चला कि यहां सब अध्यापक डर से नहीं बल्कि अपने मर्जी से पढ़ते है।

गुंजन उस लड़के से सॉरी कहने की सोच ही रही थी कि वह लड़का अपनी साइकिल से बाहर जाता दिखाई दिया।

गुंजन घर पहुंची तो मन ही मन मुस्करा रही थी क्योकि वह वो वाक्य भूल ही नहीं पा रही थी। इस बार तो वह अपनी हंसी को रोक ही नहीं पाई। वह जोर से हंस पड़ी।
‘क्या हुआ?’ गुंजन की माँ ने एक खास लेहजे पूछा।

‘नहीं माँ, कुछ नहीं।’

‘फिर भी....’

तब गुंजन ने उन्हें काॅलेज का पुरा वाक्य बताया। उसकी माँ ने हंसते हुए कहा आपने सॉरी बोला उन्हें ।

नहीं माँ, वो पहले चला गया । कल जरूर जाके बोलना।
ठीक है, माँ।

गुंजन रात का खाना खाकर अपने कमरे में सोने के लिए गई लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी उसकी आँखों के आगे तो बस उस लड़के का डरा हुआ चेहरा था।

वह सोच रही थी कि कैसे यह रात कटे और उनसे सॉरी बोलूं। फिर उसे बड़ी मुस्किल से ही सही नींद तो आ ही गयी।

सुबह देर से सोने की वजह से वह रोजाना के समय से देर से उठी तो वह जल्दी-जल्दी खाना खा काॅलेज पहुँची। काॅलेज पहुँचते ही गुंजन की आँखें उस लड़के को ढुंढने लगी। वह रोज की तरह उस वहीं उसी उसी जगह बैठा था। गुंजन उस लड़के के पास जाकर बैठ गयी। जब लड़का कुछ नहीं बोला तो वह खुद ही बोल पड़ी, ‘वो कल के लिए सॉरी!

नहीं-नहीं कोई बात नहीं। सब ठीक है..

मेरे को नींद ही नहीं आयी रात को । गुंजन ने कहा।
मै भी कहां सो पाया हुँ रात को जब भी आँख लगती तो तेरा वो भूतनी वाला चेहरा सामने आ जाता था। कल तो मैं बहुत डर ही गया था।

फिर बातचीत में पता चला कि उसका नाम सुजल है और वही उसकी तरह टाॅपर था। इस प्रकार गुंजन का रहने का तरीका पढ़ने का टाईम टेबल सब चैन्ज हो गया। कुछ दिन बाद काॅलेज में फंक्शन  था।

सुजल व गुंजन ने डांस प्रतियोगिता में भाग लिया और उनकी अच्छी तैयारी का ही नतीजा था कि वह डांस प्रतियोगिता में अव्बल आये। इसके बाद उन्हें पुरस्कार दिया गया। इस दौरान दोनो का एक साथ फाॅटोशूट भी किया गया। गुंजन उस फाॅटोशूट की एक काॅपी अपने पास अपनी किताब में रख ली।

गुंजन को पता नहीं क्या हो गया था अकेली ज्यादा रहने लगी थी। गुंजन अपने कमरे की कुण्डी लगाना भूल गयी और अपनी किताब में से वह सुजल की फोटो निकालकर देखने लगी।

इतने में गुंजन की माँ बिना दरवाजा खटखटाये कमरे मे आ गई और गुंजन उस फोटो को छुपा नहीं सकी। जब गुंजन की माँ ने उससे वह फोटो ली और पूछा बेटा यह कौन है? माँ ये वही लड़का है जो मेरे साथ डांस प्रतियोगिता में अव्बल आया था।

गुंजन की माँ थोड़ा सोच में पड़ गयी। गुंजन अपनी माँ की सोच को भांपते हुए कहने लगी ‘माँ, कोई ऐसा काम नहीं करूंगी जिससे आपकी इज्जत पर आन पडे।

गुंजन की माँ ने अपने भाई(गुंजन के मामा) को यह फोटो वाली बात दी।

परीक्षा परिणाम भी हमेशा की तरह अच्छा ही रहा।

 इस तरह गुंजन के काॅलेज वो तीन साल भी बीत गये।
गुंजन की माँ ने गुंजन से कहा कि, ‘बेटा अब तेरी शादी की उम्र हो गयी है।

तेरी नज़र में कोई लड़का है तो बता दे। नहीं माँ आप मेरी शादि जहां भी करेंगे मैं वही हंसी खुशी कर लूंगी। आप मेरी माँ है आप मेरे लिए कोई अच्छा लड़का ही ढुंढोगे।

तो फिर यह फोटो देखकर बता कैसा है ??लड़का । गुंजन ने फोटो को बिना देखे ही हां कह दी और यहां गुंजन ने यहां अदाकारी का भी उदाहरण पेश किया।

घर वालों को कहीं भी ऐसा नहीं लगा की गुंजन इस रिश्ते के लिए थोडा हिचकचा रही है......। अब देखते गुंजन भाग-चौथे में क्या होगा।

लेखकः- सुखचैन मेहरा


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