Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on October 18, 2018 with No comments
है राम चल धरती पे चलते है
तेरा गुणगान हो रहा चारों ओर।।
है राम चलो चलते है, रामधुन
सुनाई दे रही है चारों ओर।।
रावण को जलाने की तैयारी
बुराई पर अच्छाई की जीत।
चलो आप स्वयं धरती पर,
आया रावण एक और समीप।।
वसुंधरा कर रही है पुकार,
कुकर्मी रावण के नाश हेतु।
है मर्यादा पुरुष चलो चलते है,
बनाते है एक और राम सेतू।।
शेष रह गया एक दिन मात्र,
तेरे भक्तों की सुनने चलते है।
करने इस कुकर्मी का अंत
है मर्यादा पुरुष चलो चलते है।।
-:-स्वरचित-:-
सुखचैन मेहरा

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