October 21, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on October 21, 2018 with No comments

बेटा हो तो ऐसा


राजू एक बहुत ही मेहनती और ईमानदार लड़का था। राजू पढ़ाई के साथ साथ अपने पिता जी के काम में भी हाथ बंटा देता।

एक दिन राजू के पापा की तबियत खराब हो गयी। वह कई दिन तक दुकान पर नहीं गये इस कारण सेठ ने उनकी जगह किसी ओर को रख लिया था। (दीपावली पर ग्राहकी अधिक होने के कारण । )

राजू और उसकी माँ अखबार के लिफाफे तैयार करने लगे लेकिन घर और दवा का खर्च नहीं चल पाता था।

राजू को दीपावली की छुटियाँ हो गयी । वह पापा के दोस्त के यहाँ  काम करने लगा। इससे घर का खर्च ठीक से चल जाता था क्योंकि सेठ रोज शाम को उसकी मजदूरी दे देता था।

राजू के पापा दिवापली के दो तीन दिन रहते ठीक हो गए। फिर राजू अपने सेठ के यहाँ से चुने  के थैले उठा लाया और दीपावली के एक दिन रहते पुरे घर में रंग रोगन कर लिया।

आज दीपावली का दिन था । राजू की माँ राजू को देख सोचने लगी, 'छोटी सी उम्र में ही अपनी जिम्मेदारी समझने लग गया है, भगवान का लाख लाख शुक्र है।

'क्या सोच रही हो माँ?' की आवाज ने माँ को गहरी सोच से उभारा। बोली ' कुछ नहीं माँ सोच रही हूँ तू कितना बड़ा हो गया है।'
'वो तो मैं हूँ ही माँ' अपनी कोलर ऊपर करते हुए बोला।

राजू ने मिट्टी के दीपक लगा कर पुरे घर को रोशन कर दिया। मिट्टी के दीपकों की रोशनी यांत्रिक लाइट से कहीं ज्यादा सुन्दर दिखाई दे रही थी।

लक्ष्मी पूजन के बाद उसने कुछ पकोड़े अपने हाथ में लिये और बाहर भाग गया। पड़ोसियों के लड़के पटाखे फोड़ रहे थे । जब उन्होंने सारे पटाखे फोड़ लिए तब  राजू अंदर आया और अपने पटाखे एक थाली में खोलकर ले गया ।

इतने में एक आतिशबाजी आकर उन लड़कों मे से किसी एक पर आकर गिर जाती है। कपडों के आग लग जाती है ।राजू ने बिना देर किये अंदर से कम्बल लाकर आग बुझा दी। उस लड़के की शर्ट तो जरूर जल गई थी लेकिन कुछ ज्यादा नुकसान नही हुआ शरीर का।
राजू फिर से पटाखे फोड़ने लगा। एक लड़के ने राजू से पूछा तु बड़े पटाखे व आतिशबाजी क्यों नहीं लेकर आता।
राजू ने जबाव दिया ' तुझे पता है आतिशबाजी व शोर करने वाले हमारे लिए कितने खतरनाक होते है। इससे जो धुँआ निकलता है वो हमारे वातावरण को कितना खराब करता है। इसके धुंए से सांस की बीमारी व बहुत सी बीमारियां होती है। शोर वाले बड़े पटाखो से हमारे सुनने की क्षमता खत्म हो सकती है।

मेरी टीचर ने कहा है दीवाली खुशियों का त्यौहार है खुशी से ही मनाना चाहिए। मिट्टी के दीपक जलाने चाहिए जिससे हमारा वातावरण शुद्ध होता है।

भाई आज से हम भी छोटे पटाखे ही लेकर आयेंगे।
फिर सभी मिलजुलकर खुशी से पटाखे फोड़े।

सुखचैन मेहरा # 9460914014


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