Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on October 17, 2018 with No comments
माँ को पैगाम
देना एक पैगाम मेरी माँ को
खुश है तेरा बेटा परदेश में।
बहुत पैसे कमाता है, पूरे
पाँच साल बाद लौटेगा देश में।।
पर मत कहना कैसे रहता हूँ
यहां क्या हाल है मेरा।
हां, देना पैगाम मेरी माँ को
तंदरुस्त है लाल तेरा।।
देना यह पैगाम मेरी माँ को
खाना समय पर खा लेता हूँ।
पर मत कहना, भूख नहीं लगती
खाना टाइम मिले तो बना लेता हूँ
भाई, बहन को याद करता हूँ
पापा की तश्वीर देखकर सोता हूँ।
मत बताना माँ को कि कभी कभी
अकेला बैठ कर रो लेता हूँ।।
हां देना एक संदेश मेरे देशवासियों को
देश में रहकर देश की तरक्की करना,
मैं तो बस मीठी गुलामी करता हूँ।।
स्वरचित
-:-सुखचैन मेहरा-:-

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