Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on October 31, 2018 with No comments
हमसफर - 3
ऐ मेरे हमसफर ऐतबार कर
मेरी कुछ अनकही बातों का।
ऐ मेरे हमसफर ऐतबार कर
तेरे मेरे बीच के जज़्बातों का।।
ऐतबार पर कायम है ये दुनियां
बिन ऐतबार प्रेम-कल्पना नहीं।
ऐतबार से ही सुदृढ़ बने रिश्ते
बे बुनियाद शक पर नहीं।।
जिंदगी इम्तहान ले जब कभी
तुम साथ रहना मेरे हमसफर।
ऐतबार करना ऐ मेरे हमदम
सुख चैन से गुजरे ये सफर।।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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