Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on October 25, 2018 with No comments
करवा चौथ का दिन
कैसे बिताऊँ तेरे बिन
कुमकुम सजाए बैठी हूँ
एक आस लगाए बैठी हूँ
यूँ ना तड़फाओ
है साथी घर वापस जल्दी आओ
विरहाग्नि में जल रही हूँ
तुम बिन अकेली विकल रही हूँ
मुझे यूँ ना जलाओ
है साथी घर वापिस जल्दी आओ..
कुमकुम पूछे कहाँ है साथी?
रह नही गयी अब मुझमें बाकी
जरा कठोर दिल पिगलाओ
है साथी, घर वापिस जल्दी आओ..
वीरहाग्नि हुई मध्दम
कर प्रिय दर्शन,
ओह! प्रिय, क्या हालत बनाई
तू क्या जाने पीर पराई..
चलो प्रिया, शशि निकल आया
मेरा शशि तू है प्रिय , वो है पराया ।
चौथमाता का शुक्र मनाया
था उसका पिया घर आया..
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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