September 09, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on September 09, 2018 with No comments

जिंदगी की साईकल

अपनी दोनों की जिंदगी भी
इस साईकल सी चल रही है
कभी चैन उतर जाती है (बीमारी)
तो कभी हवा (अपने लोग)
ही साथ छोड़ देती है....
लेकिन सुकून की बात है कि
हम दोनों के सामंजस्य से
लगातार चल रही है....

-:-सुखचैन मेहरा -:- 9460914014


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