Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on September 20, 2018 with No comments
यश
क्यों यश खो बैठा है प्राणी?
गाता था गाथा तेरी जमाना।
क्यों अब तुं उठ नहीं पा रहा
एक मौके मुश्किल था हराना।।
कहाँ खो गया तेरा वो नाम
'ईमानदार पुरुष' था शाही।
क्यों चोला ईमान का त्यागा
तुझे ढूंढ़ रहे है तेरे हमराही।
अभी भी तेरे इंतजार में है यश
लौट आ, अब तेरी है जरूरत।
बेईमान भी बेसुमार बढ़ रहे है
बस लौट आ निकाल फुर्सत।।
-:-स्वरचित-:-
सुखचैन मेहरा

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